बैंक कर्मचारियों की 3 दिन की हड़ताल का ऐलान: किन मांगों पर अड़े हैं कर्मचारी, क्या होगा असर?

27 सितंबर को खुले रहेंगे बैंक
26 को चौथा शनिवार और 27 सितंबर को रविवार हैं। इसके बाद 3 दिन की हड़ताल की वजह बैंक सेवाएं लगातार 5 दिन बाधित हो सकती थी। ग्राहकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ही रिजर्व बैंक ने सभी सरकारी और ग्रामीण बैंकों को 27 सितंबर को खुला रखने का फैसला किया है। ALSO READ: बैंक हड़ताल से पहले बड़ी राहत! इस रविवार को खुले रहेंगे सभी सरकारी और ग्रामीण बैंक
क्यों हड़ताल पर है बैंक कर्मचारी?
फाइव-डे बैंकिंग : यूनियनों की सबसे प्रमुख मांग सभी शनिवार और रविवार को मिलाकर हफ्ते में 5 दिन कामकाज और 2 दिन की छुट्टी रखने की है। वर्तमान में बैंकों में महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को ही छुट्टी होती है। बाकि शनिवार बैंक शाखाओं में सामान्य रूप से काम होता है।
लंबे समय से लंबित मांग: यूनियनों का कहना है कि मार्च 2024 में हुए द्विपक्षीय समझौते के तहत सभी शनिवारों को अवकाश घोषित करने पर सहमति बनी थी, लेकिन सरकार और संबंधित पक्षों की ओर से इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है।
पेंशन और अन्य भत्ते: इसके अलावा बैंक कर्मचारी पेंशन से जुड़े सुधार, डीए (महंगाई भत्ता) के नियमों में एकरूपता और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू करने जैसी मांगें भी उठा रहे हैं।
पीएलआई (PLI) योजना का विरोध: हाल ही में लाई गई परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के कुछ प्रावधानों को लेकर भी कर्मचारियों में असंतोष है। ALSO READ: त्योहारी सीजन से पहले महंगाई से बड़ी राहत: सरकार ने घटाया खाद्य तेलों पर आयात शुल्क, सस्ते होंगे सोयाबीन-पाम और सूरजमुखी तेल
आम लोगों पर क्या होगा असर?
बैंकों की हड़ताल और छुट्टी के दिनों में यूपीआई, नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और एटीएम सेवाएं सामान्य रूप से चालू रहती हैं, जिससे ऑनलाइन पेमेंट और फंड ट्रांसफर में कोई दिक्कत नहीं आती। बैंक हड़ताल आम तौर पर सरकारी बैंक यूनियनों द्वारा प्रायोजित होती है। प्राइवेट बैंक के कर्मचारी इस तरह की हड़ताल में शामिल नहीं होते।
बैंक शाखाएं बंद रहने या कर्मचारियों के हड़ताल पर होने के कारण बैंक शाखाओं में कैश जमा करना, निकालना, पासबुक अपडेट कराना, केवाईसी और नए खाते खुलवाने जैसे काम प्रभावित होते हैं। हड़ताल के दौरान चेक क्लीयरिंग हाउस का काम प्रभावित होता है, जिससे चेक भुगतान और उनके पास होने में देरी हो सकती है। लोन की मंजूरी, दस्तावेजों के सत्यापन और सरकारी वित्तीय लेन-देन से जुड़े कार्यों में बाधा आ सकती है।
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