भारत के चारों दिशाओं में पवित्र स्वस्तिक: सनातन धर्म के लिए मोरारी बापू की भारत यात्रा

रामचरितमानस के प्रख्यात वक्ता एवं पूज्य संत मोरारी बापू भारत स्वस्तिक यात्रा के माध्यम से भारत की उन प्रमुख आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक भूमि को जोड़ने वाली एक अनूठी आध्यात्मिक यात्रा पर निकलेंगे, जो देश की विविधता, आस्था और सनातन परंपरा का प्रतिनिधित्व करती हैं।
यह यात्रा दो चरणों में आयोजित की जाएगी। पहला चरण 10 से 23 अक्टूबर 2026 तक कन्याकुमारी से केदारनाथ तक होगा, जबकि दूसरा चरण 14 से 22 नवंबर 2026 तक द्वारका से जगन्नाथ पुरी तक होगा। कन्याकुमारी में होने वाले यात्रा के उद्घाटन एवं प्रेस कॉन्फ्रेंस में शृंगेरी शारदा पीठम के शंकराचार्य की उपस्थिति रहेगी, जिससे यात्रा के शुभारंभ के अवसर पर देश की प्रमुख आध्यात्मिक परंपराओं में से एक की सहभागिता दर्ज होगी।
भारत स्वस्तिक यात्रा की प्रेरणा भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा में शुभता, मंगल और कल्याण के व्यापक रूप से पहचाने जाने वाले प्रतीक स्वस्तिक से ली गई है। स्वस्तिक शब्द स्वस्ति से बना है, जिसका अर्थ कल्याण, मंगल और शुभता है। यह प्रतीक सदियों से भारत के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा है।
यात्रा के बारे में बताते हुए पूज्य मोरारी बापू ने कहा, “दिव्य भारत, सेव्यमय भारत, भव्य भारत और नव्य भारत — ये चारों इस यात्रा के माध्यम से अंकित होने वाले स्वस्तिक के चारों कोण होंगे।”
मोरारी बापू ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने सनातन धर्म की भावना के साथ पूरे भारत में भ्रमण कर देश के विभिन्न हिस्सों को एक सूत्र में जोड़ने का कार्य किया। भारत की चारों दिशाएं अलग-अलग नहीं हैं, बल्कि एक ही भारत के अभिन्न अंग हैं। स्वस्तिक की चार भुजाएं इसी व्यापक एकता और राष्ट्रीय एकीकरण के उद्देश्य की याद दिलाती हैं। सनातन धर्म एक शाश्वत प्रवाह है — जो सदैव विद्यमान था, आज भी है और सदैव बना रहेगा।
यात्रा का पहला चरण कन्याकुमारी से शुरू होकर देश के कई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्रों से होकर गुजरेगा। इसमें कालडी, शृंगेरी, हम्पी, तुलजापुर, ओंकारेश्वर, झांसी, मथुरा, कुरुक्षेत्र, अटारी-वाघा और जम्मू जैसे प्रमुख पड़ाव शामिल होंगे। यात्रा का समापन उत्तराखंड के केदारनाथ में होगा।
भारत स्वस्तिक यात्रा में पूज्य मोरारी बापू के साथ कुल 900 श्रद्धालु दो विशेष ट्रेनों — कैलाश भारत गौरव ट्रेन और चित्रकूट भारत गौरव ट्रेन — से यात्रा करेंगे। इन ट्रेनों में क्रमशः 22 कोच और 16 कोच होंगे।
भारत स्वस्तिक यात्रा का दूसरा चरण 14 नवंबर को द्वारका से शुरू होकर 22 नवंबर को जगन्नाथ पुरी में संपन्न होगा। इस चरण में सोमनाथ, डाकोर, उज्जैन, नागपुर, चंपारण, मायापुर और कोलकाता जैसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक केंद्रों से होते हुए यात्रा जगन्नाथ पुरी पहुंचेगी।
पूरी भारत स्वस्तिक यात्रा के दौरान 9,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की जाएगी।
भारत स्वस्तिक यात्रा में समाज के विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों से जुड़े लोग एक साथ आएंगे। इनमें संत-महात्मा, आचार्य, विद्वान, उद्योगपति, समाजसेवी, सामाजिक नेता और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
भारत स्वस्तिक यात्रा का आयोजन मदन पालीवाल के संतकृपा सनातन संस्थान द्वारा किया जा रहा है। राजस्थान से आने वाले मदन पालीवालउद्योगपति एवं परोपकारी हैं और आध्यात्मिक क्षेत्र में भी उनकी गहरी रुचि रही है।
मदन पालीवाल, चेयरमैन, मिराज ग्रुप एवं मैनेजिंग ट्रस्टी, संतकृपा सनातन संस्थान ने कहा, “सनातन धर्म ने सदैव साझा जीवन मूल्यों और परंपराओं के माध्यम से लोगों को जोड़ने का कार्य किया है। यह यात्रा देश के विभिन्न क्षेत्रों और समाज के अलग-अलग वर्गों के लोगों को एक साथ लाने और एकता तथा राष्ट्रीय एकीकरण की भावना को मजबूत करने का अवसर है। स्वस्तिक, जो ‘स्वस्ति’ — अर्थात कल्याण और मंगल — का संदेश देता है, इस साझा यात्रा का सुंदर प्रतीक है।”
पूज्य मोरारी बापू की राम कथाएं सत्य, प्रेम और करुणा — इन तीन मूल्यों पर आधारित रही हैं। भारत स्वस्तिक यात्रा भी इन मूल्यों को देश के विभिन्न हिस्सों तक ले जाने और लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का एक और अवसर होगी।
यात्रा के दौरान आयोजित होने वाली राम कथा एवं अन्य कार्यक्रम सभी के लिए खुले रहेंगे। पूज्य बापू की समावेशी परंपरा और सेवा की भावना के अनुरूप प्रत्येक पड़ाव पर भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जहां प्रतिदिन श्रद्धालुओं एवं उपस्थित लोगों को प्रसाद स्वरूप निःशुल्क भोजन कराया जाएगा।
मोरारी बापू के बारे में
पूज्य मोरारी बापू का जन्म वर्ष 1946 में महाशिवरात्रि के दिन हुआ था। वे पिछले 65 वर्षों से अधिक समय से राम कथा का वाचन कर रहे हैं। उन्होंने मात्र 14 वर्ष की आयु में गुजरात के एक गांव में वृक्ष के नीचे राम कथा के माध्यम से अपनी आध्यात्मिक यात्रा प्रारंभ की थी। उन्हें रामचरितमानस की दीक्षा उनके दादा एवं गुरु त्रिभुवनदास जी से मिली।
वैदिक सनातन धर्म, जिसे सामान्यतः हिंदू सनातन धर्म के रूप में जाना जाता है, से प्रेरणा लेते हुए बापू की राम कथाएं विश्व शांति, सत्य, प्रेम और करुणा जैसे सार्वभौमिक मूल्यों पर केंद्रित रहती हैं। उनकी कथाओं में देश और दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों, जातियों और समुदायों के लोग सम्मिलित होते हैं।
पिछले कई दशकों में मोरारी बापू ने भारत तथा दुनिया के अनेक शहरों और तीर्थस्थलों में 950 से अधिक राम कथाएं की हैं। इनमें श्रीलंका, दक्षिण अफ्रीका, केन्या, यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, इजरायल और जापान जैसे देश भी शामिल हैं, जहां उनकी कथाओं में लाखों लोग जुड़े हैं।
हाल ही में उन्होंने भारत के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों में ट्रेन के माध्यम से यात्रा करते हुए राम कथाओं का आयोजन किया। इसके अलावा उन्होंने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय और हार्वर्ड में भी विशेष राम कथाओं का आयोजन किया है। उन्होंने विश्व भ्रमण के दौरान एक जहाज और विमान में भी राम कथा का आयोजन किया।
पारंपरिक स्थलों से आगे बढ़कर बापू ने समाज के वंचित और हाशिए पर रहने वाले वर्गों के बीच भी राम कथाएं की हैं, जिनमें सेक्स वर्कर्स और ट्रांसजेंडर समुदाय शामिल हैं। वे दुनिया के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में मानवीय सहायता के कार्यों से भी जुड़े रहे हैं, जिनमें युद्ध प्रभावित यूक्रेन और इजरायल भी शामिल हैं।
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