1.5 करोड़ रुपये की कार छोड़कर नाना पाटेकर ने बांटे 15-15 हजार रुपये के चेक, किसान परिवारों के लिए किया था बड़ा काम

नाना पाटेकर का बड़ा दिल! 1.5 करोड़ की कार नहीं खरीदी, किसान परिवारों की मदद में लगा दिए पैसे
नाना पाटेकर सिर्फ अपनी दमदार अदाकारी के लिए ही नहीं, बल्कि अपने संवेदनशील दिल के लिए भी याद किए जाएंगे। 75 साल की उम्र में उनके निधन की खबर से सिनेमा जगत शोक में है, लेकिन उनके जीवन से जुड़ा एक किस्सा अब फिर चर्चा में है। नाना ने 1.5 करोड़ रुपये की कार खरीदने का फैसला बदलकर वह रकम किसान आत्महत्या से प्रभावित परिवारों की मदद में लगाने का फैसला किया था। उन्होंने 15-15 हजार रुपये के चेक बनवाकर जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाए थे।
1.5 करोड़ की कार नहीं खरीदी, किसान परिवारों को दी रकम
नाना पाटेकर को जब पता चला कि किसान आत्महत्याओं के कारण कई परिवार मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं, तो उन्होंने अपनी प्राथमिकता बदल दी।
जिस कार को वह अगले दिन करीब 1.5 करोड़ रुपये में खरीदने वाले थे, उसे खरीदने के बजाय उन्होंने अपने एक कलाकार मित्र से 15-15 हजार रुपये के चेक तैयार करवाए और किसान परिवारों के बीच बांटने के लिए कहा।
नाना का यह फैसला बताता है कि वह किसानों और उनके परिवारों की परेशानियों को कितनी गंभीरता से महसूस करते थे। इसी संवेदनशील सोच के साथ उन्होंने नाम फाउंडेशन की शुरुआत की, जिसने बाद में लगातार फंड जुटाने का काम किया।
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गुस्से को लेकर भी साफ थी नाना की सोच
नाना पाटेकर के गुस्से को लेकर अक्सर तरह-तरह की बातें होती रही हैं। लेकिन उनके साथ काम कर चुके लोगों के मुताबिक, वह हर बात पर गुस्सा नहीं करते थे। जब उन्हें कोई बात गलत लगती थी, तभी वह अपनी नाराजगी जाहिर करते थे।
इसका एक उदाहरण सड़क पर कचरा फेंकने की घटना से जुड़ा है। एक बार उन्होंने सड़क पर बोतल फेंकते हुए एक व्यक्ति को देखा तो अपनी गाड़ी रोकी और उस व्यक्ति की गाड़ी को ट्रैफिक सिग्नल पर रोककर सवाल किया।
नाना ने उससे पूछा कि देश को स्वच्छ कौन रखेगा? उन्होंने महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि अब इस देश में रहने वाले नागरिकों की जिम्मेदारी है कि वे सफाई का ध्यान रखें। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर उसकी गाड़ी डस्टबिन है तो क्या वह बोतल उसके अंदर फेंक दें?
नाना के इस अंदाज में गुस्सा जरूर था, लेकिन उसके पीछे सार्वजनिक जिम्मेदारी और देश को साफ रखने की सोच थी।
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किसान परिवारों के लिए दर्द था नाना के दिल में
नाना पाटेकर का किसानों के प्रति जुड़ाव उनके काम से भी दिखाई देता था। वह खुद फार्म पर रहते थे और किसान परिवारों की परेशानियों को लेकर संवेदनशील थे।
1.5 करोड़ रुपये की कार खरीदने के बजाय उसी रकम को जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाने का फैसला उनकी सोच का एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आता है। उनका मानना था कि अगर किसी दुखी इंसान के आंसू पोंछने की कोशिश की जाए, तो किसी को नुकसान पहुंचाने की बात ही नहीं हो सकती।
45 मिनट तक हुई बचाने की कोशिश
नाना पाटेकर का गोवा स्थित घर पर कार्डियक अरेस्ट के बाद निधन हुआ। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, उन्हें बचाने के लिए करीब 45 मिनट तक डॉक्टरों ने लगातार कोशिश की, लेकिन उन्हें होश में नहीं लाया जा सका। सुबह 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
75 साल की उम्र में नाना पाटेकर का जाना सिनेमा के लिए बड़ा नुकसान है। उन्होंने पर्दे पर कई यादगार किरदार निभाए, लेकिन उनके जाने के बाद उनके अभिनय के साथ-साथ उनकी इंसानियत से जुड़े किस्से भी उन्हें लंबे समय तक याद दिलाते रहेंगे।
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