फिर दिल्ली की सड़क पर आइसा : नेहा बोरा समेत 150 लोग हिरासत में, 2 अक्टूबर के प्रदर्शन मामले में 3 प्राथमिकी दर्ज
मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर शनिवार को पटेल चौक से जंतर मंतर की ओर मार्च करने का प्रयास करने वाले करीब 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया गया. हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण शामिल हैं.
कपिल सिब्बल, प्रशांत भूषण भी उतरे सड़क पर
आइसा के सदस्यों ने बताया कि वरिष्ठ अधिवक्ताओं कपिल सिब्बल, नित्या रामकृष्णन, पल्लव सिसोदिया और प्रशांत भूषण के साथ कार्यकर्ता योगेंद्र यादव भी बोरा और अन्य छात्रों के साथ मार्च में शामिल हुए. प्रदर्शन स्थल के पास प्रदर्शनकारियों के जुटते ही पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेना शुरू कर दिया. सुरक्षाकर्मियों को कई जगहों पर तैनात किया गया था और जंतर-मंतर की ओर जाने वाली सड़कों पर अवरोधक लगाए गए थे.
आइसा ने नेहा बोरा से धक्का-मुक्की के लगाये आरोप
आइसा के सदस्यों ने आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान एक पुरुष पुलिस अधिकारी ने नेहा बोरा के साथ धक्का-मुक्की की और दिल्ली पुलिस के एक अन्य अधिकारी ने उन्हें अपशब्द कहे. इन आरोपों की तत्काल स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी. आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा के आह्वान के बाद शनिवार को प्रदर्शनकारी पटेल चौक पर जमा हुए.
बोरा की अपील पर सड़क पर उतरे आइसा कार्यकर्ता
शुक्रवार को हिरासत में लिये जाने के एक दिन बाद नेहा बोरा ने कार्यकर्ताओं से फिर जंतर-मंतर लौटने और विरोध प्रदर्शन जारी रखने को कहा था. प्रदर्शनकारी मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चिंता जताते हुए सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.
2 अक्टूबर को 1000 से अधिक लोगों को लिया गया था हिरासत में
इस घटनाक्रम से एक दिन पहले पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों ने प्रदर्शनकारियों को प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से रोक दिया था. इसके बाद जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों से करीब 1,000 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था. बाद में हिरासत में लिए गए कई लोगों को रिहा कर दिया गया.
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2 अक्टूबर के प्रदर्शन मामले में 3 प्राथमिकी दर्ज
दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को हुए प्रदर्शनों के सिलसिले में कम से कम 3 प्राथमिकी दर्ज की हैं. इनमें से 2 संसद मार्ग थाने में और एक कनॉट प्लेस थाने में दर्ज की गयी है. ये प्राथमिकी भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223 के तहत दर्ज की गयीं हैं, जो लोक सेवक द्वारा विधिवत जारी आदेश की कथित अवज्ञा से संबंधित है.
किसी व्यक्ति का संगठन को नहीं बनाया आरोपी
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि प्राथमिकी में किसी व्यक्ति या संगठन को आरोपी नहीं बनाया गया है. हालांकि, उनमें प्रदर्शन का प्रस्ताव देने वाले या उसमें शामिल आयोजकों और संगठनों का विवरण दिया गया है.
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दिल्ली पुलिस ने नहीं दी थी विरोध प्रदर्शन की अनुमति
दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार के विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी और मध्य दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी थी. शुक्रवार के प्रदर्शन के दौरान कई सड़कों पर अवरोधक लगाए गए थे और जंतर-मंतर के आसपास कई मेट्रो स्टेशनों में प्रवेश व निकास को अस्थायी रूप से सीमित कर दिया गया था. दूसरे दिन यानी शनिवार को भी जंतर-मंतर के आसपास पुलिस की तैनाती जारी रही, जबकि आइसा और अन्य संगठनों ने अपना प्रदर्शन जारी रखा.
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