रूसी सेना में 259 भारतीयों की भर्ती, 69 की जान को खतरा; 2 लाख सैलरी का लालच देकर भेजा था युद्ध में
विदेश मंत्रालय ने रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रूसी सेना में भारतीय नागरिकों की भर्ती को लेकर गंभीर चिंता जतायी है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार ( 7 अगस्त ) को बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 259 भारतीयों के रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती होने की जानकारी सामने आई है. इनमें से 69 भारतीय अभी भी रूसी सेना के साथ सेवा में बताए जा रहे हैं.
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत सरकार ने रूस के साथ लगातार बातचीत कर 139 भारतीयों की समय से पहले रिहाई सुनिश्चित की है. वहीं, रूसी सेना में अब भी मौजूद भारतीयों की जल्द रिहाई और स्वदेश वापसी के लिए मॉस्को के साथ बातचीत जारी है.
'भर्ती में गंभीर खतरा, ऐसे ऑफर से दूर रहें'
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारतीय नागरिकों को रूसी सेना में शामिल होने के किसी भी प्रस्ताव से दूर रहने की अपील की है. मंत्रालय ने इसे 'गहरी चिंता का विषय' बताते हुए चेतावनी दी कि इस तरह की भर्ती में जिंदगी के लिए गंभीर खतरा है.
दो साल से लगातार सामने आ रहे मामले
रूसी सेना में भारतीयों की भर्ती का मुद्दा पिछले करीब दो वर्षों से लगातार सामने आता रहा है. इस दौरान कई भारतीयों के वीडियो सामने आये, जिनमें उन्होंने रूसी सेना के साथ फंसे होने और युद्ध क्षेत्र में भेजे जाने की बात कही. कई परिवारों ने भी भारत सरकार से अपने परिजनों की सुरक्षित वापसी के लिए हस्तक्षेप की मांग की.
तेलंगाना के युवकों को नौकरी का दिया गया था लालच
ताजा मामला तेलंगाना से सामने आया है. यहां कई युवकों ने आरोप लगाया कि वे रूस में अच्छी नौकरी और मोटी सैलरी के लालच में गये थे, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उन्हें सैन्य शिविरों में ले जाया गया. बाद में उन्हें सैनिकों के रूप में काम करने और यूक्रेन सीमा के आसपास के इलाकों में भेजे जाने की बात कही गयी.
2 लाख रुपये सैलरी और 8 लाख के बीमा का दावा
निजामाबाद निवासी कस्तूरी तिरुपति ने बताया कि वह और दो अन्य लोग 27 सितंबर को रूस गये थे. उन्हें करीब 2 लाख रुपये मासिक वेतन और 8 लाख रुपये के इंश्योरेंस बोनस का भरोसा दिया गया था. हालांकि, रूस पहुंचने के बाद उन्हें एक सैन्य शिविर में ले जाया गया और बताया गया कि उन्हें सैनिकों की ड्यूटी दी जायेगी.
30 लोगों ने सांसद से मांगी मदद
तिरुपति के अनुसार, करीब 30 ऐसे लोगों ने निजामाबाद के सांसद धर्मपुरी अरविंद से संपर्क किया, जो सैन्य शिविर से निकलना चाहते थे. उन्होंने सभी को बचाने और भारत वापस लाने के लिए मदद मांगी. तिरुपति ने बताया कि 20 से ज्यादा लोग अब भी रूस में हैं, जबकि वह दो अन्य लोगों के साथ भारत लौटने में सफल रहे.
4 अन्य तेलंगाना परिवारों ने भी लगाया आरोप
इस घटनाक्रम से कुछ दिन पहले तेलंगाना के चार अन्य परिवारों ने भी आरोप लगाया था कि उनके परिजन नौकरी के लिए रूस गये थे, लेकिन उन्हें रूसी सेना में भर्ती कर लिया गया. परिवारों का कहना था कि युवकों को शुरुआत में निर्माण कार्य और अन्य मजदूरी से जुड़ी नौकरियों का भरोसा दिया गया था, लेकिन बाद में उन्हें रूस-यूक्रेन सीमा के पास तैनात कर दिया गया.
2024 में भी सामने आये थे ऐसे मामले
मार्च 2024 में सोशल मीडिया पर रूसी सैन्य वर्दी में भारतीय युवकों के कई वीडियो सामने आये थे. इनमें कुछ युवकों ने दावा किया था कि उन्हें धोखे से रूसी सेना में शामिल कराया गया और युद्ध के मोर्चे की ओर जाने के लिए मजबूर किया जा रहा है.
7 युवकों ने भारत सरकार से लगायी थी गुहार
ऐसे ही एक मामले में सात भारतीय युवकों के एक समूह ने भारत सरकार और भारतीय दूतावास से मदद की अपील की थी. युवकों का कहना था कि उन्होंने ऐसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किये थे, जिन्हें वे समझ नहीं सके और इसके बाद उन्हें रूसी सेना में शामिल कर लिया गया.
पंजाब से कश्मीर तक सामने आये थे मामले
इसी दौरान पंजाब, तेलंगाना, कर्नाटक, गुजरात और कश्मीर के कई परिवारों ने भी अपने परिजनों के रूस में फंसे होने की शिकायत की थी. परिवारों का कहना था कि उनके रिश्तेदारों को रूसी सरकारी कार्यालयों में हेल्पर की नौकरी का भरोसा देकर रूस ले जाया गया, लेकिन बाद में उन्हें युद्ध क्षेत्र की ओर भेज दिया गया.
पूर्व सैनिक ने वीडियो जारी कर मांगी थी मदद
पश्चिम बंगाल के पूर्व सैनिक उर्गेन तमांग का मामला भी काफी चर्चा में रहा था. उन्होंने वीडियो जारी कर भारत सरकार से उन्हें बचाने की अपील की थी. तमांग का दावा था कि उन्हें एक सैन्य शिविर में ले जाया गया और बताया गया कि उन्हें यूक्रेन में लड़ने के लिए जाना होगा. इसके बाद उनके परिवार और स्थानीय अधिकारियों ने उनकी सुरक्षित वापसी के लिए मदद मांगी थी.
भारत की नागरिकों से अपील
विदेश मंत्रालय ने एक बार फिर भारतीय नागरिकों से अपील की है कि वे रूस में आकर्षक नौकरी के नाम पर मिलने वाले ऐसे किसी भी प्रस्ताव की अच्छी तरह जांच करें और रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती होने से पूरी तरह बचें. सरकार का कहना है कि ऐसे मामलों में फंसने पर जान का गंभीर खतरा हो सकता है.
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