रूस में 'प्लेग' की आशंका से अमेरिका अलर्ट, क्या भारत में भी लौट सकता है 1994 वाला खौफ?
रूस के साइबेरिया में एक महिला की मौत के बाद प्लेग की आशंका को लेकर चिंता बढ़ गई है. अमेरिका भी इस मामले पर नजर रख रहा है. बताया जा रहा है कि 28 साल की दर्या शिपिलोवा एक एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में लैब वर्कर थीं. उन्हें गंभीर निमोनिया होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था. वेंटिलेटर पर रखने के बावजूद 2 दिन बाद उनकी मौत हो गई. अब सवाल उठ रहा है कि क्या यह प्लेग का मामला है और क्या भारत को भी सतर्क रहने की जरूरत है?
रूस ने अभी नहीं किया है कंफर्म
हालांकि, रूस के अधिकारियों ने अभी प्लेग की पुष्टि नहीं की है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी अधिकारियों ने महिला की बीमारी को अज्ञात कारणों से हुआ निमोनिया बताया है. जांच में उनके काम से जुड़े सूक्ष्मजीवों का पता नहीं चला. अधिकारियों ने यह भी कहा है कि किसी खतरनाक रोगाणु से जुड़ी दुर्घटना का कोई सबूत नहीं मिला है.
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रूस में क्या हुआ, 200 लोगों पर नजर
रिपोर्ट के मुताबिक, दर्या को 29 सितंबर को गंभीर निमोनिया के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था. रिपोर्टों में आशंका जताई गई कि रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम करने के दौरान वह प्लेग के बैक्टीरिया के संपर्क में आई होंगी. एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि उन्होंने मेडिकल स्टाफ को बताया था कि उनसे गलती से जीवित बैक्टीरिया वाली टेस्ट ट्यूब टूट गई थी. हालांकि, रूसी अधिकारियों ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है.
महिला की मौत के बाद उनके संपर्क में आए लोगों की पहचान की गई और उन्हें मेडिकल निगरानी में रखा गया. रिपोर्टों के अनुसार, करीब 200 लोगों को निगरानी में रखा गया, जबकि तीन अस्पतालों में भी क्वारंटाइन से जुड़े कदम उठाए गए. अधिकारियों का कहना है कि अभी तक किसी बड़े संक्रमण के फैलने का सबूत नहीं मिला है. संपर्क में आए लोगों में लक्षण नहीं दिखे और उनकी जांच के नतीजे भी निगेटिव बताए गए.
अमेरिका क्यों रख रहा है नजर?
इस मामले पर अमेरिका भी लगातार नजर रख रहा है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि वॉशिंगटन स्थिति पर करीब से नजर बनाए हुए है. चिंता इस बात को लेकर है कि कहीं संक्रमण रिसर्च सेंटर के अंदर दूसरे लोगों तक तो नहीं पहुंचा.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा कि अमेरिका इस मामले पर नजर रख रहा है और रूस को मदद देने के लिए तैयार है. हालांकि, अमेरिका ने भी प्लेग की पुष्टि नहीं की है. चिंता फिलहाल इस बात को लेकर है कि अगर कोई खतरनाक संक्रमण अपने शुरुआती स्थान से बाहर फैलता है, तो वह तेजी से दूसरे इलाकों तक पहुंच सकता है.
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क्या भारत में भी लौट सकता है 1994 वाला प्लेग?
भारत में प्लेग का आखिरी बड़ा प्रकोप 1994 में सामने आया था. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के रिकॉर्ड के मुताबिक, महाराष्ट्र के बीड जिले के ममला गांव और आसपास के इलाकों में अगस्त और सितंबर 1994 के दौरान प्लेग के 63 मामले सामने आए थे. इसके बाद गुजरात के सूरत में भी मामले सामने आए. डब्ल्यूएचओ के आकलन के मुताबिक, सूरत में प्लेग के प्रकोप के दौरान 876 मामले दर्ज किए गए और 54 लोगों की मौत हुई थी.
करीब 28 साल के अंतराल के बाद भारत में प्लेग के मामले सामने आने से उस समय चिंता बढ़ गई थी. अब रूस में सामने आई संदिग्ध बीमारी ने एक बार फिर इस संक्रमण को लेकर सवाल खड़े किए हैं.
हालांकि, रूस में अभी प्लेग की पुष्टि नहीं हुई है और भारत में भी इस घटना से जुड़े किसी प्रकोप की जानकारी नहीं दी गई है. इसलिए फिलहाल इसे भारत में प्लेग की वापसी मानना सही नहीं होगा. लेकिन किसी भी संदिग्ध संक्रमण पर नजर रखना और समय रहते उसकी जांच करना जरूरी है.
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