JD Vance H-1B विवाद: भारतीयों पर टिप्पणी से भड़का भारत, जानें पूरा मामला

Oct 10, 2026 - 22:05
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JD Vance H-1B विवाद: भारतीयों पर टिप्पणी से भड़का भारत, जानें पूरा मामला

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने विदेशी कर्मचारियों को ‘विदेशी बंधुआ मजदूर’ बताकर नई बहस छेड़ दी है. भारत ने इस शब्दावली को ‘बेहद आपत्तिजनक’ बताते हुए कहा कि अमेरिका में भारतीय पेशेवर उसकी अर्थव्यवस्था और इनोवेशन इकोसिस्टम में अहम योगदान देते हैं.

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आखिर जेडी वेंस ने क्या कहा?

8 अक्टूबर को अपने बयान में जेडी वेंस ने कंपनियों पर आरोप लगाया कि वे अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकालकर उनकी जगह कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को रख रही हैं.

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, फोटो ANI
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, फोटो ANI

माइक्रोसॉफ्ट समेत कई कंपनियों का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा, 'आप अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकालकर उनकी जगह विदेशी बंधुआ मजदूरों को नहीं रख सकते.'

यह बयान अमेरिकी कंपनियों के ग्रीन कार्ड प्रायोजन से जुड़ी प्रक्रिया पर लगाए गए प्रतिबंधों के बीच आया.

भारत ने क्यों जताई आपत्ति?

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि भारतीय पेशेवरों के लिए इस्तेमाल की गई यह शब्दावली अनुचित है और अमेरिका की अर्थव्यवस्था में उनके योगदान की अनदेखी करती है.

विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि अमेरिका का इतिहास खुद उन पीढ़ियों के योगदान से बना है, जो दूसरे देशों से आकर वहां बसीं. उनके श्रम, उद्यम और नवाचार ने अमेरिका की समृद्धि में भूमिका निभाई है.

Ministry of External Affairs (MEA) spokesperson Randhir Jaiswal
Ministry of External Affairs (MEA) spokesperson Randhir Jaiswal

भारत ने ‘Indentured Servants’ जैसे शब्दों को ऐतिहासिक और औपनिवेशिक पीड़ा से जुड़ा बताते हुए गहरी आपत्ति जताई.

किन 8 कंपनियों पर लगा प्रतिबंध?

अमेरिकी प्रशासन ने आठ कंपनियों के लिए PERM कार्यक्रम के तहत आवेदन प्रक्रिया रोकने की घोषणा की है. इनमें शामिल हैं:

  • माइक्रोसॉफ्ट
  • एडोबी
  • कॉग्निजेंट
  • इन्फोसिस
  • टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS)
  • विप्रो
  • एचसीएल
  • कैपजेमिनी

इस फैसले के तहत संबंधित कंपनियों के लंबित PERM आवेदनों की प्रक्रिया रोक दी गई है और नए आवेदन स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं.

क्या H-1B वीजा भी हो जाएगा रद्द?

नहीं, PERM पर रोक का मतलब H-1B वीजा रद्द होना नहीं है.

H-1B वीजा अमेरिका में विशेष कौशल वाले पेशेवरों के अस्थायी रोजगार से जुड़ा है. वहीं, PERM रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड पाने की कुछ श्रेणियों में एक महत्वपूर्ण चरण है.

भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि PERM आवेदनों पर रोक अपने आप मौजूदा H-1B वीजा या उसके धारकों और आश्रितों की स्थिति को प्रभावित नहीं करती.

हालांकि, प्रभावित कंपनियों के पात्र कर्मचारियों की स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में परेशानी या देरी हो सकती है.

PERM और ग्रीन कार्ड का क्या है कनेक्शन?

अमेरिका में रोजगार के आधार पर स्थायी निवास पाने की कुछ श्रेणियों में नियोक्ता को पहले श्रम प्रमाणन की प्रक्रिया पूरी करनी होती है.

इस प्रक्रिया में आम तौर पर यह दिखाना होता है कि संबंधित पद पर योग्य अमेरिकी कर्मचारियों की उपलब्धता और उनके रोजगार की स्थितियों को नियमानुसार ध्यान में रखा गया है.

PERM प्रक्रिया रुकने से संबंधित कंपनियों के कर्मचारियों के ग्रीन कार्ड आवेदन आगे बढ़ने में बाधा आ सकती है. हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव हर कर्मचारी की व्यक्तिगत इमिग्रेशन स्थिति पर निर्भर करेगा.

H1B वीजा
H1B वीजा

क्या भारतीय IT कंपनियों पर पड़ेगा बड़ा असर?

इस फैसले का असर केवल वीजा तक सीमित नहीं है. इससे कंपनियों की प्रतिभा-भर्ती, कर्मचारियों को लंबे समय तक अपने साथ बनाए रखने और अमेरिका में रोजगार रणनीति पर भी असर पड़ सकता है.

हालांकि, शुरुआती आकलनों में भारतीय IT कंपनियों पर निकट भविष्य में बड़े वित्तीय प्रभाव की आशंका सीमित बताई गई है. इसका अर्थ यह नहीं कि कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया या भविष्य की भर्ती को लेकर अनिश्चितता खत्म हो गई है.

आगे का असर अमेरिकी जांच, प्रतिबंधों की अवधि और कंपनियों के लिए उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर निर्भर करेगा.

भारत-अमेरिका संबंधों के लिए क्या है संदेश?

यह विवाद दो सवाल सामने रखता है—क्या विदेशी प्रतिभाओं के योगदान और अमेरिकी कर्मचारियों के हितों के बीच संतुलन बनाया जा सकता है? और क्या आव्रजन नियमों के कथित दुरुपयोग पर कार्रवाई करते समय सभी विदेशी पेशेवरों को एक ही नजर से देखना उचित है?

भारत का तर्क है कि कुशल प्रतिभाओं की आवाजाही दोनों देशों के लिए फायदेमंद है. वहीं, अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि अमेरिकी कर्मचारियों के हितों की रक्षा की जानी चाहिए.

इसलिए असली चुनौती केवल वीजा नीति की नहीं, बल्कि रोजगार, प्रतिभा, आर्थिक हितों और भारत-अमेरिका साझेदारी के बीच संतुलन बनाने की है.

नोट: यह वेब स्टोरी 9 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध रिपोर्टों और भारत के विदेश मंत्रालय के बयान पर आधारित है.

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