2500 करोड़ के प्लांट पर 70 KM दूर बिजली ग्रिड, जानिए सीएम के सामने क्यों रखनी पड़ीं ये 3 बड़ी मांगें

Oct 05, 2026 - 13:29
0 0
2500 करोड़ के प्लांट पर 70 KM दूर बिजली ग्रिड, जानिए सीएम के सामने क्यों रखनी पड़ीं ये 3 बड़ी मांगें

Jamui Ethanol Plant Demands: बिहार के जमुई जिले में 2500 करोड़ की लागत से आकार ले रहे एशिया के सबसे बड़े इथेनॉल प्लांट को लेकर उम्मीदें आसमान पर हैं. लेकिन इतने बड़े औद्योगिक सपने को धरातल पर निर्बाध रूप से चलाने के लिए सिर्फ मशीनों और इमारतों का खड़ा होना ही काफी नहीं होता.

जमीन पर सबसे बड़ी जरूरत होती है मजबूत बुनियादी ढांचे की. जब उरवा में निर्माणाधीन अंकुर बायोकेम इथेनॉल प्लांट का जायजा लेने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पहुंचे, तो कंपनी के डायरेक्टर महेंद्र शर्मा ने इलाके की तीन ऐसी जमीनी समस्याओं को उनके सामने रख दिया, जिन पर तुरंत ध्यान न दिया गया तो अरबों रुपये का यह प्रोजेक्ट हिचकोले खा सकता है. सड़क, बिजली और सुरक्षा से जुड़ी इन तीन मांगों ने साफ कर दिया है कि किसी पिछड़े इलाके को इंडस्ट्रियल हब बनाने के लिए प्रशासन को किस तरह अपनी रफ्तार बढ़ानी होगी.

70 किलोमीटर दूर से बिजली लाने की मजबूरी, स्थानीय ग्रिड क्यों है बेहद जरूरी

किसी भी विशालकाय आधुनिक फैक्ट्री की धड़कन उसकी बिजली आपूर्ति होती है. अंकुर बायोकेम प्लांट के डायरेक्टर महेंद्र शर्मा ने मुख्यमंत्री को बताया कि फिलहाल जहां यह इथेनॉल प्लांट बन रहा है, वहां से निकटतम पावर ग्रिड की दूरी लगभग 70 किलोमीटर है. इतने बड़े इंडस्ट्रियल सेटअप के लिए इतनी दूर से बिजली खींचना न सिर्फ तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है, बल्कि इसमें बार-बार ट्रिपिंग और पावर कट का खतरा भी बना रहता है. यदि उत्पादन के दौरान बिजली की सप्लाई ठप होती है, तो कंपनी को रोजाना लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है.

यही वजह है कि कंपनी प्रबंधन ने स्थानीय स्तर पर ही एक नया पावर ग्रिड स्थापित करने की जोरदार वकालत की है ताकि प्लांट को बिना किसी रुकावट के चौबीसों घंटे निर्बाध बिजली मिल सके.

चकाई-देवघर मुख्य मार्ग से सीधी कनेक्टिविटी, भारी वाहनों के लिए मजबूत सड़क की दरकार

इथेनॉल प्लांट में रोजाना भारी मात्रा में कच्चे माल यानी अनाज की आवक होगी और तैयार इथेनॉल को देश के कोने-कोने में भेजने के लिए टैंकरों का बड़ा काफिला निकलेगा. इसके लिए सामान्य ग्रामीण सड़कें नाकाफी साबित होंगी. महेंद्र शर्मा ने मुख्यमंत्री से मांग की कि चकाई-देवघर मुख्य मार्ग से लेकर इथेनॉल प्लांट तक एक विशेष इंडस्ट्रियल ग्रेड सड़क का निर्माण कराया जाए.

भारी-भरकम ट्रकों और टैंकरों के आवागमन से साधारण सड़कें बहुत जल्दी टूट जाती हैं, जिससे न केवल कंपनी का लॉजिस्टिक्स प्रभावित होता है बल्कि आसपास के ग्रामीणों को भी धूल और खड्डों के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है. एक समर्पित और मजबूत सड़क बनने से जहां भारी वाहनों की राह आसान होगी, वहीं स्थानीय लोगों को भी एक बेहतर और सुरक्षित रास्ता मिल सकेगा.

2500 करोड़ के भारी निवेश की सुरक्षा, उरवा में पुलिस चौकी स्थापित करने की उठी आवाज

उरवा और चकाई का यह क्षेत्र लंबे समय तक बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा संबंधी चिंताओं से जूझता रहा है. जब किसी सुनसान या ग्रामीण इलाके में 2500 करोड़ रुपये का विशाल प्रोजेक्ट बनता है और वहां हजारों मजदूर तथा इंजीनियर काम करते हैं, तो सुरक्षा व्यवस्था पहली प्राथमिकता बन जाती है.

निर्माण कार्य के दौरान बेशकीमती मशीनों की सुरक्षा से लेकर आगे चलकर प्लांट के सुचारु संचालन तक, हर कदम पर सुरक्षा का कड़ा पहरा जरूरी है. इसी रणनीतिक जरूरत को ध्यान में रखते हुए डायरेक्टर ने प्लांट परिसर के समीप एक स्थाई पुलिस चौकी स्थापित करने का आग्रह किया. इससे न सिर्फ कंपनी की संपत्ति और कर्मचारियों को सुरक्षा मिलेगी, बल्कि आसपास के गांवों में भी कानून-व्यवस्था का माहौल मजबूत होगा और असामाजिक तत्वों पर नकेल कसी जा सकेगी.

ऑन द स्पॉट सीएम का एक्शन, अधिकारियों को जल्द समाधान के सख्त निर्देश

कंपनी प्रबंधन द्वारा रखी गई इन तीनों जायज मांगों पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बेहद सकारात्मक रुख दिखाया. उन्होंने माना कि इतने बड़े इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट की सफलता के लिए सड़क, बिजली और सुरक्षा प्राथमिक शर्तें हैं. मुख्यमंत्री ने मौके पर ही मौजूद शासन और प्रशासन के उच्च अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन तीनों मांगों को सर्वोच्च प्राथमिकता पर लिया जाए.

उन्होंने अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि सड़क निर्माण, बिजली ग्रिड के प्रस्ताव और पुलिस चौकी की स्थापना की प्रक्रिया को बिना किसी लालफीताशाही के जल्द से जल्द पूरा किया जाए. मुख्यमंत्री के इस आश्वासन से न केवल कंपनी प्रबंधन को बड़ी राहत मिली है, बल्कि वहां मौजूद आम लोगों में भी यह संदेश गया है कि सरकार इस प्रोजेक्ट को लेकर पूरी तरह गंभीर है.

स्थानीय लोगों पर असर और चकाई के भविष्य की तस्वीर

इन तीन बुनियादी सुविधाओं के विकसित होने से सिर्फ इथेनॉल प्लांट को ही फायदा नहीं होगा, बल्कि इसका सबसे बड़ा लाभ उरवा और आसपास के ग्रामीण इलाकों को मिलेगा. जब 70 किलोमीटर दूर के बजाय पास में पावर ग्रिड बनेगा, तो आसपास के दर्जनों गांवों की बिजली समस्या में सुधार होगा.

इंडस्ट्रियल सड़क बनने से स्थानीय दुकानदारों, किसानों और राहगीरों को आवागमन में सहूलियत होगी. वहीं पुलिस चौकी बनने से पूरे क्षेत्र में अपराध पर अंकुश लगेगा. यानी 2500 करोड़ का यह इथेनॉल प्रोजेक्ट चकाई के आम लोगों के जीवन स्तर को सुधारने और इस इलाके को वास्तविक मायनों में एक विकसित औद्योगिक क्षेत्र में बदलने का जरिया बन रहा है.

Also Read: अनप्रेडिक्टेबल चिराग: बॉलीवुड के फ्लॉप हीरो से लेकर दिल्ली-पटना के सबसे सस्पेंसफुल खिलाड़ी तक की पूरी कहानी

Also Read: मुजफ्फरपुर की जीविका दीदियों का बैग मॉडल क्यों अपनाना चाहता है झारखंड? दूसरी बार बिहार पहुंची टीम

The post 2500 करोड़ के प्लांट पर 70 KM दूर बिजली ग्रिड, जानिए सीएम के सामने क्यों रखनी पड़ीं ये 3 बड़ी मांगें appeared first on Prabhat Khabar.

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User