कैसे हुई तुर्की में लाखों लोगों के साथ म्युचुअल फंड धोखाधड़ी

तुर्की के जिन आम लोगों ने शेयर बाजार में पैसा लगाया, वो एक ही बात जानना चाहते हैं कि क्या उनके पैसे की कोई वैल्यू है? जब देश में महंगाई की दर 30 फीसदी हो, तो मुद्रा के मूल्य का अंदाजा लगाना कठिन जरूर हो जाता है। इसी कारण कई लोग सोना, विदेशी मुद्रा, शेयर और म्युचुअल फंड खरीदने लगे। इस वादे के साथ कि, उन्हें अच्छा रिटर्न मिलेगा। ALSO READ: ट्रंप के बहुमत को आग लगा सकता है महंगा डीजल
लेकिन करीब पांच लाख तुर्क निवेशकों के लिए शेयर बाजार एक फंदा साबित हुआ। सितंबर मध्य में BIST 100 इंडेक्स एक ही दिन के भीतर 6 फीसदी गिर गया। अगले कुछ दिनों के भीतर यह गिरावट 12 फीसदी तक पहुंच गई।
इतनी तेज गिरावट असल में शेयर बाजार में एक बड़ी धांधली की वजह से आई। इसका खामियाजा करीब 4,55,000 निवेशकों ने भुगता। इस मामले में अब तक 45 से ज्यादा लोग गिरफ्तार किए गए हैं। राष्ट्रपति रेचप तैयप एर्दोवान की सत्ताधारी, जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी (एकेपी) के एक दिग्गज नेता को भी पद से इस्तीफा देना पड़ा है।
तुर्की के शेयर बाजार में कैसे हुई धांधली?
इस धांधली का परतें तब खुलनी शुरू हुईं जब कुछ निवेश फंड, अपने निवेशकों को समय पर पैसा नहीं लौटा सके। ऐसा करने वाले निवेश फंड्स को टेरा और पुसुला पोर्टफॉय जैसी बड़ी कंपनियां मैनेज कर रही थीं। टेरा के दो फंड्स में तो कुल 6.5 अरब यूरो की संपत्ति थी।
भुगतान ना किये जाने पर कैपिटल मार्केट बोर्ड (एसपीके) ने दखल दिया और सात एसेट मैनेजर्स के फंड्स बंद कर दिए। इनमें टेरा, पुसुला और एटलस जैसे नाम शामिल थे। तुर्की की सरकारी न्यूज एजेंसी अनादोलू के मुताबिक, कुल 131 फंड्स ऐसे हैं, जिनकी संपत्ति, नकद भुगतान में बदलना है।
इस्तांबुल का अभियोजन विभाग अब धोखाधड़ी, पूंजी बाजार के नियमों के उल्लंघन और आपराधिक गठजोड़ बनाने के आरोपों की जांच कर रहा है। यह एलना खुद देश के न्याय मंत्री अकिन गुर्लेक ने किया है। शक है कि, फंड कंपनियों ने अपने फंड्स की वैल्यू को नकली तरीके से काफी बढ़ाया। सच्चाई यह थी कि उनके फंड्स में "कचरे जैसे स्टॉक" भरे पड़े थे।
गिरफ्तार किए गए 45 लोगों में इनवेस्टमेंट फर्मों के शीर्ष अधिकारी हैं। 42 लोगों और 46 रजिस्टर्ड फर्मों की संपत्ति सीज की जा चुकी है। इस्तांबुल के शेयर बाजार ने भी कार्रवाई करते हुए एक अक्टूबर को 27 शेयरों को BIST 100 से हटा दिया है। ALSO READ: तेल कंपनियों का मुनाफा फिर बंपर, देशों की हालत खस्ता
क्या निवेशकों को वापस मिलेगा उनका पैसा?
अब कई फंड्स की संप्पति, नकदी में बदली जा रही है। इससे मिलने वाली रकम, निवेशकों को उनकी हिस्सेदारी के हिसाब से बांटी जाएगी। इसके लिए तय समयसीमा को तीन महीने से बढ़ाकर छह महीने कर दिया गया है। इस्तांबुल में रहने वाली एक स्वतंत्र वित्तीय सलाहकार, आयसेल गुंदोग्दू के मुताबिक, यह बिकवाली के दबाव से बचने के लिए किया गया है। फटाफट बिक्री के दबाव से वैल्यू कम हो सकती थी। लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि हर फंड का नकदीकरण छह महीने में होगा। यह प्रक्रिया जल्दी भी पूरी हो सकती है। लेकिन, कोई गारंटी नहीं है।
इनवेस्टमंड फंड कोई बचत खाता नहीं है। फंड की वैल्यू में होने वाला नुकसान, इसके निवेशक को सीधे प्रभावित करता है। गुंदोग्दू को लगता है कि मनी मार्केट वाले फंड, पर्याप्त पैसा जुटा लेंगे। लेकिन हेज फंड और इक्विटी फंड, हालात को बहुत ही मुश्किल बना सकते हैं। ऐसे फंड के पास बड़ी संख्या में ऐसे शेयर है, जिनकी वैल्यू ना के बराबर है।
अर्थशास्त्री और लेखक-समीक्षक गुलदेम अताबाय कहती हैं कि, वैल्यू में नुकसान और धांधली के बीच साफ अंतर किया जाना चाहिए। निवेश बाजार जोखिम के अधीन होते हैं, लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि उन्हें गलत जानकारी स्वीकार करनी चाहिए, मसलन, जानबूझकर बढ़ाए गए दाम या निगरानी की कमी। ALSO READ: चीन ने क्यों बढ़ाई टेक कंपनियों और टैलेंट की यात्रा पर सख्ती
क्या फंड कंपनियां और मैनेजर नुकसान की भरपाई के लिए जिम्मेदार हैं?
जब फंड्स को बंद किया जाता है या नकदी में बदला जाता है तो ही उसमें शामिल शेयर और प्रतिभूतियों को बेचा जा सकता है। लेकिन सवाल है कि उनकी कीमत कितनी मिलेगी और उन्हें कितनी आसानी से बेचा जा सकेगा?
फाइनेंस एक्सपर्ट गुंदोग्दू मानती है कि फंड की संपत्तियां, निवेशकों के क्लेम को पूरा नहीं कर पाएंगी। वह इसे वित्तीय ढांचे की एक बड़ी नाकामी कहती हैं, "यह संकट, तरल पूंजी के संकट से कहीं ज्यादा बड़ा है। यह मैनेजमेंट और निगरानी में गड़बड़ी का मामला है।"
गुंदोग्दू के मुताबिक, फंड संस्थापकों और उसके मैनजरों की संपत्तियों से भी हर्जाने की भरपाई की जा सकती है। अर्थशास्त्री अताबाय मांग कर रहे हैं धांधली के दोषियों को पहचाना जाए और उनसे हर्जाना वसूला जाए, "नकदीकरण, जबावदेही का विकल्प नहीं है।"
इस धांधली की राजनीतिक कीमत?
इस धोखाधड़ी के सामने आने के बाद सत्ताधारी एकेपी पार्टी की एक वरिष्ठ महिला नेता ने इस्तीफा दिया है। फातमा बेतुल सयान काया, पार्टी की उपाध्यक्ष थीं। वह तुर्की की पारिवारिक मामलों की मंत्री भी रह चुकी है। फातमा ने राष्ट्रपति और एकेपी के प्रेसीडेंट रेचप तैयप एर्दोवान से खुद को "सभी पदों से मुक्त करने" की मांग की। तुर्की में एकेपी पार्टी के भीतर इस तरह से पदभार मुक्ति को, जबरन इस्तीफे से जोड़ा जाता है।
फातमा और उनके पति पर आरोप है कि वे फंड संकट से सीधे तौर पर जुड़े हैं। फातमा का दावा है कि उन्होंने जांच में कोई बाधा न आए, इसीलिए इस्तीफा दिया है। अब विपक्ष इस मुद्दे को संसद में उठाने की तैयारी कर रहा है। विपक्ष इस बात की जांच कराने की मांग कर रहा है कि क्या राजनेता, धोखाधड़ी के इस खेल में शामिल तो नहीं हैं।
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