नवी पिल्लै को नोबेल शांति पुरस्कार: क्या 7 अक्टूबर के जख्मों की अनदेखी हुई?

Oct 10, 2026 - 22:05
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नवी पिल्लै को नोबेल शांति पुरस्कार: क्या 7 अक्टूबर के जख्मों की अनदेखी हुई?

9 अक्टूबर 2026 को नवी पिल्लै को नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा हुई. तारीख पर गौर कीजिए—हमास के नेतृत्व में इजरायल पर हुए 7 अक्टूबर 2023 के हमले की तीसरी बरसी के ठीक दो दिन बाद. इजरायल के लिए यह महज एक पुरस्कार नहीं, बल्कि उस हमले और उसके बाद शुरू हुए युद्ध की अंतरराष्ट्रीय व्याख्या से जुड़ा राजनीतिक तथा नैतिक सवाल है.

पिल्लै के नेतृत्व वाले संयुक्त राष्ट्र जांच आयोग ने सितंबर 2025 में निष्कर्ष दिया था कि गाजा में इजरायल ने नरसंहार किया. इजरायल ने इस आरोप को खारिज किया. अब उसी आयोग की पूर्व अध्यक्ष को शांति पुरस्कार मिलने से सवाल उठ रहा है—क्या अंतरराष्ट्रीय न्याय को सम्मान दिया गया है या इजरायल के खिलाफ एक विवादित निष्कर्ष को नैतिक वैधता मिल रही है?

WSJ ने क्यों उठाए सवाल?

अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल के संपादकीय बोर्ड ने अपने लेख 'A Nobel Prize for Hating Israel' में पुरस्कार के फैसले की तीखी आलोचना की है. उसका तर्क है कि पिल्लै के करियर का बाद का हिस्सा इजरायल की आलोचना और अंतरराष्ट्रीय कानून में नरसंहार की परिभाषा के कथित राजनीतिक इस्तेमाल से जुड़ा रहा है.

WSJ
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WSJ के अनुसार, हमास जैसे नागरिक आबादी के बीच काम करने वाले सशस्त्र संगठन के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को नरसंहार कहना गंभीर कानूनी सवाल पैदा करता है. हालांकि, यह अखबार का संपादकीय दृष्टिकोण है, अदालत का निष्कर्ष नहीं.

7 अक्टूबर: क्या पीड़ितों की स्मृति पीछे छूट गई?

7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में हुए हमलों में लगभग 1,200 लोग मारे गए और 251 लोगों को बंधक बनाकर गाजा ले जाया गया. इजरायल के लिए यह हमला केवल सैन्य चुनौती नहीं, बल्कि नागरिकों की हत्या, बंधक संकट और राष्ट्रीय सुरक्षा का गहरा आघात था.

सार्जेंट याम गोल्डस्टीन और उनके पिता नादाव के अंतिम संस्कार के दौरान इज़राइली सैनिक शोक मना रहे हैं. याम और उनके पिता की हत्या 7 अक्टूबर, 2023 को हमास के चरमपंथियों ने कर दी थी.
AP/PTI(AP10_24_2023_000003A)
सार्जेंट याम गोल्डस्टीन और उनके पिता नादाव के अंतिम संस्कार के दौरान इज़राइली सैनिक शोक मना रहे हैं. याम और उनके पिता की हत्या 7 अक्टूबर, 2023 को हमास के चरमपंथियों ने कर दी थी. AP/PTI(AP10_24_2023_000003A)

इसी पृष्ठभूमि में पिल्लै के आयोग की रिपोर्ट और उसके बाद मिला नोबेल सम्मान इजरायल में नाराजगी पैदा कर रहे हैं. आलोचकों का कहना है कि यदि पुरस्कार का संदेश अंतरराष्ट्रीय न्याय की रक्षा करना है, तो हमास के अपराधों और इजरायली पीड़ितों की पीड़ा को भी समान गंभीरता से सामने रखा जाना चाहिए.

गौर करने वाली बात है कि इस अवॉर्ड की घोषणा 7 अक्टूबर की बरसी के दो दिन बाद की गई. और जिस तरह पिल्लई को सम्मानित किया गया, उससे लोगों के मन में इस अवॉर्ड के राजनीतिकरण को लेकर सवाल उठना लाजमी है.

‘Jewish lobby’ विवाद और निष्पक्षता का सवाल

पिल्लै की आलोचना का एक बड़ा आधार जुलाई 2022 का विवाद है. आयोग के सदस्य मिलून कोठारी ने कहा था कि सोशल मीडिया पर प्रभाव डालने वाली ताकतों में ‘Jewish lobby’ की भूमिका है. इस टिप्पणी की आलोचना हुई. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष ने भी कहा कि ऐसी टिप्पणी को यहूदी समुदाय के कलंकित किए जाने के रूप में समझा जा सकता है.

पिल्लै ने कोठारी का बचाव करते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी को संदर्भ से अलग करके पेश किया गया. इजरायल और अन्य आलोचकों ने इसे आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने का आधार बनाया.

नवनथेम नावी पिल्लई. फोटो- X
नवनथेम नावी पिल्लई. फोटो- X

क्या संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट अंतिम फैसला है?

नहीं.

पिल्लै की अध्यक्षता वाला आयोग जांच निकाय था, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय नहीं.

उसकी रिपोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर नरसंहार के चार कृत्यों और विशिष्ट इरादे का निष्कर्ष दिया. इजरायल ने आरोपों को खारिज किया. दक्षिण अफ्रीका बनाम इजरायल मामले में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय द्वारा जारी अंतरिम उपाय भी नरसंहार किए जाने का अंतिम फैसला नहीं थे.

इसलिए रिपोर्ट गंभीर कानूनी महत्व रखती है, लेकिन उसे अंतिम न्यायिक निर्णय बताना गलत होगा.

क्या यह नोबेल पुरस्कार का मजाक है?

इजरायल के दृष्टिकोण से, 7 अक्टूबर की बरसी के ठीक दो दिन बाद उस जांच आयोग की अध्यक्ष को शांति पुरस्कार मिलना, जिसने इजरायल पर नरसंहार का आरोप लगाया, पीड़ितों की स्मृति के प्रति असंवेदनशील प्रतीत हो सकता है. WSJ का संपादकीय भी पुरस्कार को शांति के उद्देश्य के विपरीत मानता है.

दूसरी ओर, नोबेल समिति इस बयान को कम महत्व देती हुई नजर आ रही है. उसका कहना है कि पिल्ले को यह सम्मान अंतरराष्ट्रीय कानून और युद्ध अपराधों के लिए जवाबदेही के क्षेत्र में उनके लंबे समय से किए जा रहे योगदान के लिए दिया गया है.

अंतिम सवाल यही है: क्या शांति का सम्मान करते समय न्याय के सभी पीड़ितों को समान महत्व दिया गया? तारीख अपने आप में पुरस्कार को मजाक साबित नहीं करती. लेकिन 7 अक्टूबर के पीड़ितों, बंधकों और उनके परिवारों की पीड़ा को नजरअंदाज करके शांति की सार्वभौमिक भाषा अधूरी जरूर रह जाएगी.

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