कैसे ब्रिटेन को जर्मनी और ईयू के करीब लाए ट्रंप

गुरुवार को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नम पहली बार बर्लिन में जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स से मिले। इस मुलाकात ने यूरोप में तेजी होते रणनैतिक बदलावों की तस्वीर पेश की है। बर्लिन पहुंचे बर्नम ने पहले मैर्त्स के साथ लंच किया और फिर दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर बातचीत और साझेदारियों का रास्ता तैयार किया गया। ALSO READ: प्रदर्शन का हक बनाम पुलिस की पाबंदी, क्या कहता है संविधान
बर्लिन में बर्नम की मेजबानी करते हुए मैर्त्स ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक दिन है। जुलाई 2025 में जर्मनी और ब्रिटेन के बीच केन्सिंग्टन संधि हुई थी। 27 पन्नों वाली इस संधि को गुरुवार को आधिकारिक तौर पर कानूनी मंजूरी दे दी गई। केन्सिंग्टन संधि दोनों देशों के बीच विज्ञान, तकनीक, रक्षा, सुरक्षा और विकास के क्षेत्र में गहरे सहयोग के लिए है। इन नई संधियों का जिक्र करते हुए मैर्त्स ने कहा "इसीलिए तो हम ये कर रहे हैं ताकि युवा पीढ़ी ये जान सके कि यूरोपीय संघ के जर्मनी और ग्रेट ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय रिश्ते कैसे हमें करीब लाते हैं और दिखाते हैं कि हम यूरोपीय एक दूसरे के साथ मिलकर कितने अच्छे से काम कर सकते हैं।"
क्या है जीकैप प्रोग्राम
इस दौरान बर्नम ने कहा कि ब्रिटेन, जीकैप प्रोग्राम में जर्मनी को शामिल करने के लिए तैयार है। जीकैप, ब्रिटेन, इटली और जापान की साझेदारी है। इसके तहत ये देश मिलकर छठी पीढ़ी का नया लड़ाकू विमान बनाना चाहते हैं। बर्लिन में प्रेस कॉन्फ्रेस के दौरान ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने कहा, "मैंने चांसलर को संकेत दिया है।।।।जीकैप में जर्मनी के शामिल होने के प्रति अपने खुलेपन का।" हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह इस मुद्दे पर इटली और जापान से भी बात करने को तैयार हैं।
जापान, ब्रिटेन और इटली, चीन और रूस के अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों के जबाव में एआई और एडवांस्ड सेंसरों से लैस फाइटर जेट बनाना चाहते हैं। जुलाई 2026 में पहली बार इसका प्रोग्राम का विस्तार कर, कनाडा को एक पर्यवेक्षक के रूप में इसमें शामिल किया गया। ब्रिटेन को लगता है कि यूरोफाइटर टाइफून बनाने में जर्मनी, ब्रिटेन और इटली ने मिलकर काम किया था और इसी सहयोग को फिर से दोहराया जा सकता है। इस तरह हर पक्ष पर बहुत ज्यादा वित्तीय बोझ भी नहीं पड़ेगा।
जीकैप प्रोग्राम के तहत विकसित किए जाने वाले अत्याधुनिक लड़ाकू विमान को 2035 तक उड़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इटली इस प्रोग्राम में अन्य देशों को शामिल करने के लिए तैयार दिखता है, लेकिन जापान को मनाने के लिए कुछ मशक्कत करनी पड़ सकती है। कुछ विशेषज्ञों को लगता है कि नए पार्टनरों को शामिल करने से प्रोग्राम में देरी हो सकती है। फिलहाल इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व ब्रिटेन की बीएई सिस्टम्स, इटली की लियोनार्डो और जापान की मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज कर रही हैं। ALSO READ: क्या सऊदी अरब पर भारी पड़ रहे हैं हूथी?
ब्रिटेन और जर्मनी के बीच एक साझा सुरक्षा साझेदारी की शुरुआत
गुरुवार को पेश किया गया एक साझेदारी समझौता अंदरूनी तोड़फोड़, साइबर हमले और अन्य तरह के हाइब्रिड खतरों से मिलकर लड़ने का वादा करता है। इसमें खतरे के तौर पर किसी देश का नाम नहीं लिया गया है, लेकिन इशारा रूस की तरफ है। बर्लिन रवाना होने से लंदन में बर्नम ने कहा, "हमारे आधारभूत ढांचे, कारोबार और लोकतंत्र पर हमला अब कोई दूरगामी खतरा नहीं रह गया है। ऐसे हमले लोगों के घरों, दफ्तरों तक पहुंच रहे हैं। और इनका लक्ष्य हमें कमजोर करना और ज्यादा विभाजित करना है।"
ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने कहा, "ब्रिटेन और जर्मनी अपनी शक्ति को मिलाकर, ऐसी गतिविधियों का पर्दाफाश करेंगे और उन्हें बाधित करेंगे।" ज्वाइंट पार्टनरशिप के तहत दोनों देश सूचना साझा करेंगे, मिलकर निगरानी करेंगे और संवेदनशील आधारभूत ढांचे की रक्षा करने के लिए मिलकर काम करेंगे। बर्नम और मैर्त्स की मुलाकात से पहले यह भी कहा गया कि दोनों देश यूक्रेन की मदद और मध्य पूर्व संकट पर भी बात करेंगे। होर्मुज जलडमरूमध्य के समुद्री मार्ग के बंद होने से वैश्विक कारोबार पर पड़ रहा असर भी इस बातचीत का हिस्सा होगा।
जर्मनी और ब्रिटेन स्थानीय विकास को बढ़ावा देने के लिए भी मिलकर काम करेंगे। इसके तहत औद्योगिक साझेदारी को मजबूत किया जाएगा और निवेश के मौके बनाए जाएंगे। दोनों देश राजनीति में बढ़ते दक्षिणपंथी रुझान का सामना कर रहे हैं। बर्लिन और लंदन को लगता है कि आर्थिक समृद्धि को समुदायों तक पहुंचाना पक्का करना ही होगा।
यूरोपीय संघ और ब्रिटेन को करीब लाने में ट्रंप की भूमिका
जून 2016 में ब्रिटेन में यूरोपीय संघ से अलग होने के लिए ब्रेक्जिट जनमत संग्रह पर वोटिंग हुई। मतदान में 52 फीसदी लोगों ने यूरोपीय संघ से अलग होने का समर्थन किया। इसके बाद तमाम कानूनी बिंदुओं को पूरा करते हुए 31 जनवरी 2020 की आधी रात को ब्रिटेन, यूरोपीय संघ से अलग हो गया।
इस जुदाई के बाद, अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम में तेजी से बदलाव हुआ। फरवरी 2022 में रूस ने यूक्रेन पर हमला कर यूरोप में युद्ध की शुरुआत कर दी। ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस समेत यूरोप के कई देशों को इससे गहरा धक्का लगा। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत यह किसी देश की संप्रभुता का खुला उल्लंघन था। ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने इस युद्ध में यूक्रेन की मदद करने का एलान किया। तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन भी यूरोप और यूक्रेन के साथ खड़े रहे। रूस को अलग थलग व आर्थिक रूप से कमजोर करने के लिए मॉस्को पर कई तरह के प्रतिबंध भी लगाए गए।
लेकिन जनवरी 2025 में जैसे ही डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से अमेरिका का राष्ट्रपति पद संभाला, वैसे ही यूरोपीय देशों के रणनीतिक समीकरण गड़बड़ाने लगे। दूसरी बार सत्ता में लौटते ही ट्रंप, टैरिफ युद्ध छेड़ दिया। इस दौरान उन्होंने अमेरिका के पक्के साझेदार कहे जाने वाले ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, कनाडा, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों को भी नहीं छोड़ा। दूसरा कार्यकाल शुरू करने के दो महीने के भीतर ही ट्रंप ने अपने ओवल ऑफिस में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की को पूरी दुनिया के सामने बेइज्जत किया।
जेलेंस्की को ताने सुनाने और टैरिफ वॉर के साथ ही ट्रंप अपने कई बयानों और फैसलों से अक्सर नाटो पर वार करते भी दिखे। अमेरिकी राष्ट्रपति के ग्रीनलैंड को सैन्य हस्तक्षेप से हथियाने के विवाद ने भी यूरोप को झकझोरा।
एक तरफ दोस्तों से ऐसा व्यवहार और दूसरी तरफ ट्रंप, कई बार रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को रिझाते भी नजर आए। ट्रंप के निमंत्रण पर कई दशकों बाद पुतिन, पहली बार अमेरिका का दौरा करने वाले रूसी राष्ट्रपति बने। सितंबर 2026 आते आते इस बात के स्पष्ट संकेत मिलने लगे हैं कि अब कनाडा और यूरोपीय देश, ट्रंप से विमुख होकर अपने लिए नई और अमेरिका पर कम निर्भर व्यवस्था बनाना शुरू कर चुके हैं। ALSO READ: ट्रंप के बहुमत को आग लगा सकता है महंगा डीजल
क्या फिर से यूरोपीय संघ में शामिल होगा ब्रिटेन
ट्रंप के व्यवहार, ईरान युद्ध और रूस और चीन की बढ़ती साझेदारी ने यूरोपीय राजधानियों को बेचैन कर दिया है। भूराजनीति के बदल चुके समीकरणों के बीच अब यूरोपीय संघ और ब्रिटेन फिर से करीब आ रहे हैं। इस बीच फ्रांसीसी नेताओं ने एक बार फिर कहा है कि ब्रिटेन का यूरोपीय संघ में स्वागत है।
बीबीसी से बात करते हुए फ्रांस के वित्त मंत्री रोलां लेस्क्यूर ने कहा, "ब्रिटेन के लोगों का फैसला था, और वह 100 फीसदी उनका अधिकार था और अब अगर वे वापस आना चाहते हैं तो उन्हें ही फैसला करना होगा। मैं उन्हें यही कह सकता हूं कि: जब चाहें वापस आ जाएं।"
जुलाई 2026 में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने बर्नम भी ये सुझाव दे चुके हैं कि यूरोपीय संघ में लौटने का फैसला, लेबर पार्टी के भविष्य के घोषणा पत्र में होगा। सितंबर में अपनी लेबर पार्टी के अधिवेशन में बर्नम ने कहा कि ब्रेक्जिट ने "भले से ज्यादा बुरा" किया है। बर्नम ने यह भी कहा कि अगर ब्रिटेन की जनता, यूरोपीय संघ में वापस शामिल होना चाहेगी तो वह पार्टी के अगले घोषणा पत्र में इस पर वोटिंग का वादा कर सकते हैं।
बाद में आईटीवी न्यूज से बातचीत में बर्नम ने कहा, "अभी हम दुनिया भर में जिस तरह के खतरे देख रहे हैं, उनके मद्देनजर यूरोपीय संघ के करीब रहना ज्यादा अच्छा है।"
बर्नम के इन बयानों का फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों और स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज स्वागत कर चुके हैं। सांचेज तो यह भी कह चुके हैं कि ईयू में ब्रिटेन की वापसी का स्वागत "खुली बाहों से" किया जाएगा।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)