अयोध्या में राजनाथ सिंह, कहा- योगी के नेतृत्व में यूपी की शासन व्यवस्था उत्कर्ष पर

Rajnath Singh Ayodhya Visit: रामनगरी अयोध्या पहुंचे देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सबसे पहले प्रभु श्रीरामलला के दरबार में मत्था टेका और हनुमानगढ़ी में बजरंगबली के दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद वे रानोपाली स्थित ऐतिहासिक उदासीन ऋषि संगत आश्रम पहुंचे, जहां उन्होंने गुरु पर्व महोत्सव के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।
इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने आश्रम परिसर में नवनिर्मित श्रीनारायण राम संस्कृत विद्यालय भवन का भव्य लोकार्पण किया। कार्यक्रम के दौरान एक विशाल संत सम्मेलन और जनसभा का भी आयोजन हुआ, जिसको लेकर स्थानीय प्रशासन और पुलिस व्यवस्था पूरी तरह मुस्तैद नज़र आई।
प्रदेश के स्कूलों में लागू हो वैदिक गणित
जनसभा को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि यदि उत्तर प्रदेश में पुनः योगी आदित्यनाथ की सरकार बनती है, तो वे मुख्यमंत्री से प्रदेश के सभी विद्यालयों में 'वैदिक गणित' की पढ़ाई अनिवार्य रूप से शुरू कराने का आग्रह करेंगे। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि वैदिक गणित की अपनी अद्भुत विशिष्टता है और आज लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स जैसे विश्वस्तरीय संस्थानों में भी इसे पढ़ाया जा रहा है।
संस्कृत महाविद्यालय बनेगा बड़ा केंद्र
उन्होंने कहा कि नवनिर्मित भवन केवल छात्रों के निवास का साधन नहीं है, बल्कि इसे संस्कृत शिक्षा और आधुनिक ज्ञान के एक बड़े एवं व्यापक केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ना होगा।
रक्षा मंत्री ने योगी सरकार की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि उनके कुशल संरक्षण में 'शासन व्यवस्था' और 'सनातन व्यवस्था' दोनों ही अपने उत्कर्ष पर हैं। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन में संतों के संघर्ष, बलिदान और यातनाओं को याद करते हुए उन्हें नमन किया।
अयोध्या चेतना और संस्कृति का केंद्र
राजनाथ सिंह ने कहा कि देवभाषा संस्कृत में ज्ञान, विज्ञान और अध्यात्म का अद्भुत संगम है। अयोध्या केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं है, बल्कि यह भारत की चेतना, संस्कृति और सभ्यता का प्राण केंद्र है। भगवान श्रीराम ने इस पावन धरती से पूरी दुनिया को धर्म, न्याय और मर्यादा का अमर संदेश दिया है।
उन्होंने आगे कहा कि आज का दिन आश्रम के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होगा। यह नया भवन केवल ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों तक भारतीय परंपराओं और ज्ञान को पहुँचाने के अटूट संकल्प का प्रतीक है।
संस्कृत और आधुनिक शिक्षा का अद्भुत समन्वय
संस्कृत को पूर्णतः वैज्ञानिक भाषा बताते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार संस्कृत के अध्ययन को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ने पर विशेष बल दे रही है। यह समन्वय युवा पीढ़ी को अपनी समृद्ध जड़ों से जोड़े रखने के साथ-साथ भविष्य की आधुनिक आवश्यकताओं के लिए भी तैयार करेगा। संस्कृत पढ़ रहे विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि वे देश का स्वर्णिम भविष्य हैं और भारतीय संस्कृति के सच्चे ध्वजवाहक हैं।
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