अमेरिका में Microsoft पर H-1B वीजा के दुरुपयोग का आरोप, ग्रीन कार्ड कार्यक्रम से निलंबित, कई भारतीय कंपनियां भी घेरे में

Microsoft पर क्यों हुई कार्रवाई?
वेंस ने अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी और विदेशी कर्मचारियों के लिए वीजा आवेदन को सरकार की कार्रवाई से जोड़ते हुए कई आंकड़े सामने रखे। उन्होंने कहा कि Microsoft ने 2025 में करीब 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की थी। कंपनी ने कथित तौर पर यह प्रमाणित किया था कि इन पदों के लिए उसे योग्य अमेरिकी कर्मचारी नहीं मिल सके। इसके साथ ही वेंस के मुताबिक, Microsoft को 6,000 से अधिक H-1B वीजा के लिए मंजूरी मिली थी। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी ने 3,682 PERM आवेदन दाखिल किए थे। PERM प्रक्रिया के जरिए अमेरिकी नियोक्ता विदेशी कर्मचारियों को अमेरिका में स्थायी रूप से नियुक्त करने के लिए आगे बढ़ते हैं।
वेंस के अनुसार, इन आवेदनों में करीब 1,000 पद ऐसे थे जो उन नौकरियों से मिलते-जुलते थे, जिन पर पहले अमेरिकी कर्मचारियों को नियुक्त किया गया था और बाद में उनकी छंटनी कर दी गई।
JD Vance ने H-1B वीजा को लेकर क्या कहा?
वेंस ने H-1B व्यवस्था के मौजूदा इस्तेमाल की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का इस्तेमाल मुख्य रूप से ऐसे अत्यधिक कुशल विदेशी कर्मचारियों के लिए होना चाहिए, जिनकी जरूरत उन नौकरियों के लिए हो जिन्हें अमेरिकी कर्मचारियों से नहीं भरा जा सकता। उन्होंने H-1B कार्यक्रम में धोखाधड़ी की आशंका भी जताई। वेंस ने Microsoft पर अन्य अमेरिकी कंपनियों की तुलना में इस व्यवस्था का सबसे अधिक दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। हालांकि, ये अमेरिकी प्रशासन की ओर से लगाए गए आरोप हैं। उपलब्ध रिपोर्ट में Microsoft का इन आरोपों पर पक्ष शामिल नहीं है।
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन विदेशी कर्मचारियों और इमिग्रेशन से जुड़े कार्यक्रमों की समीक्षा और निगरानी बढ़ा रहा है।
भारतीय IT कंपनियां भी कार्रवाई के दायरे में
अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सोंडरलिंग (Keith Sonderling) ने कहा कि Microsoft अकेली कंपनी नहीं है, जिसके खिलाफ कार्रवाई की गई है। उन्होंने कई अन्य कंपनियों को भी इस कार्यक्रम से निलंबित किए जाने की जानकारी दी। इन कंपनियों में Cognizant, Infosys, Tata, Wipro, HCO, Capgemini और Adobe के नाम शामिल हैं।
इससे संकेत मिलता है कि अमेरिकी प्रशासन अब यह जांच अधिक बारीकी से कर रहा है कि कंपनियां कुशल विदेशी कर्मचारियों को अमेरिका लाने वाले कार्यक्रमों का इस्तेमाल किस तरह कर रही हैं। अमेरिकी सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य अमेरिकी कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना और यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी कर्मचारी कार्यक्रमों का ऐसा इस्तेमाल न हो, जिससे अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार के अवसर या वेतन प्रभावित हों।
H-1B कार्यक्रम का इस्तेमाल अमेरिका की टेक्नोलॉजी कंपनियां दुनिया भर से कुशल कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए करती हैं। इसमें भारत के IT पेशेवरों की बड़ी हिस्सेदारी है। अमेरिकी प्रशासन की इस कार्रवाई से उन कंपनियों की वीजा और ग्रीन कार्ड प्रक्रियाओं की जांच बढ़ सकती है, जो बड़ी संख्या में विदेशी कुशल कर्मचारियों पर निर्भर हैं। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि उसका उद्देश्य विदेशी कर्मचारियों और अंतरराष्ट्रीय छात्रों से जुड़े कार्यक्रमों को उनके निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप इस्तेमाल सुनिश्चित करना है।
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