Infosys, TCS, Wipro समेत भारतीय IT कंपनियां Green Card प्रोग्राम से निलंबित, Trump के फैसले का भारतीय कर्मचारियों पर क्या होगा असर

Oct 09, 2026 - 11:52
0 0
Infosys, TCS, Wipro समेत भारतीय IT कंपनियां Green Card प्रोग्राम से निलंबित,  Trump के फैसले का भारतीय कर्मचारियों पर क्या होगा असर

अमेरिका में काम कर रहे हजारों भारतीय IT पेशेवरों के लिए ट्रंप प्रशासन का नया फैसला चिंता बढ़ाने वाला है। अमेरिकी श्रम विभाग ने Infosys, TCS, Wipro, HCL, Cognizant और Tata समेत कई कंपनियों को PERM Green Card कार्यक्रम से निलंबित कर दिया है। Microsoft, Adobe और Capgemini जैसी कंपनियां भी कार्रवाई के दायरे में हैं। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब अमेरिकी प्रशासन H-1B वीजा और विदेशी कर्मचारियों से जुड़े कार्यक्रमों में कथित गड़बड़ी और दुरुपयोग की जांच कर रहा है।

ALSO READ: अमेरिका में Microsoft पर H-1B वीजा के दुरुपयोग का आरोप, ग्रीन कार्ड कार्यक्रम से निलंबित, कई भारतीय कंपनियां भी घेरे में

क्या है PERM Green Card कार्यक्रम?

 

PERM यानी Permanent Labor Certification अमेरिका में रोजगार के आधार पर ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है। इसके जरिए कोई अमेरिकी नियोक्ता यह प्रमाणित करता है कि संबंधित नौकरी के लिए योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं है और इसलिए वह विदेशी कर्मचारी को स्थायी रूप से नियुक्त करना चाहता है।

 

H-1B वीजा पर अमेरिका में काम कर रहे कई विदेशी पेशेवर, जिनमें बड़ी संख्या भारतीयों की है, रोजगार के आधार पर स्थायी निवास यानी Green Card की दिशा में आगे बढ़ने के लिए इसी प्रक्रिया का इस्तेमाल करते हैं।

 

ALSO READ: Maruti Suzuki : मारुति की कार खरीदने का मौका, इन मॉडल्स पर मिल रहा ₹1.36 लाख तक का फायदा, जानिए किस कार पर कितनी बचत

भारतीय IT कर्मचारियों के लिए क्यों बढ़ी चिंता?

 

इस फैसले का सीधा असर उन भारतीय IT कर्मचारियों पर पड़ सकता है, जिनकी Green Card प्रक्रिया इन कंपनियों के माध्यम से चल रही है या शुरू होने वाली है। PERM प्रक्रिया में नियोक्ता की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में कंपनियों के कार्यक्रम से निलंबित होने पर नए आवेदन या पहले से चल रही प्रक्रियाओं में देरी, अतिरिक्त जांच और अनिश्चितता पैदा हो सकती है। खासकर वे कर्मचारी प्रभावित हो सकते हैं जो लंबे समय से अमेरिका में H-1B वीजा पर काम कर रहे हैं और अब स्थायी निवास हासिल करने की प्रक्रिया में हैं।

 

क्या भारतीयों का H-1B वीजा रद्द हो जाएगा?

 

नहीं। यह बात समझना बेहद जरूरी है।

 

PERM कार्यक्रम से कंपनियों का निलंबन अपने आप में यह नहीं बताता कि इन कंपनियों के सभी कर्मचारियों के मौजूदा H-1B वीजा रद्द कर दिए गए हैं। इसी तरह सभी Green Card आवेदन भी अपने आप रद्द नहीं हो जाते। फिलहाल सबसे बड़ा असर नियोक्ता के जरिए रोजगार आधारित Green Card प्रक्रिया पर पड़ने वाली संभावित देरी और अतिरिक्त जांच के रूप में देखा जा सकता है।

ALSO READ: Electric Scooter : इलेक्ट्रिक स्कूटर क्यों हैं भविष्य की सवारी? जानिए वो फायदे जिन्हें नजरअंदाज करना मुश्किल

ट्रंप प्रशासन ने क्यों लिया यह फैसला?

 

अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने H-1B कार्यक्रम के कथित दुरुपयोग को लेकर टेक कंपनियों पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि H-1B कार्यक्रम का उद्देश्य ऐसे अत्यधिक कुशल विदेशी कर्मचारियों को अमेरिका लाना है, जिनके लिए योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं। उनका आरोप है कि इस व्यवस्था में धोखाधड़ी और दुरुपयोग बढ़ गया है। अमेरिकी अटॉर्नी जनरल Todd Blanche ने भी कहा कि यह कार्रवाई अमेरिका में काम करने वाले नियोक्ताओं को स्पष्ट संदेश देती है कि ट्रंप प्रशासन अमेरिकी कर्मचारियों के साथ भेदभाव को बर्दाश्त नहीं करेगा।

 

Microsoft का उदाहरण देकर Vance ने क्या कहा?

Vance ने Microsoft का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि कंपनी ने एक तरफ बड़ी संख्या में अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की और दूसरी तरफ हजारों H-1B वीजा तथा Green Card हासिल किए। Vance के मुताबिक, Microsoft ने पिछले साल करीब 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की, जबकि कंपनी को करीब 6,300 H-1B वीजा और लगभग 3,000 Green Card का लाभ मिला। हालांकि, ये आंकड़े और आरोप अमेरिकी प्रशासन की ओर से दिए गए हैं। उपलब्ध रिपोर्ट में संबंधित कंपनियों की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।

 

TCS, Infosys और Wipro पर क्या असर?

 

भारतीय IT कंपनियां अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय और अन्य विदेशी कुशल पेशेवरों को रोजगार देती हैं। ऐसे में PERM कार्यक्रम से निलंबन से इन कंपनियों की नई Green Card sponsorship प्रक्रिया अधिक जांच के दायरे में आ सकती है।

 

इसका असर तीन स्तरों पर देखने को मिल सकता है—

 

पहला, Green Card में देरी: जिन कर्मचारियों के लिए PERM प्रक्रिया शुरू होनी है, उनके मामलों में देरी हो सकती है। दूसरा, कंपनियों पर अतिरिक्त जांच: भारतीय IT कंपनियों को यह साबित करने के लिए अधिक दस्तावेज और प्रक्रियागत अनुपालन करना पड़ सकता है कि संबंधित पद वास्तव में विदेशी कर्मचारी के लिए क्यों जरूरी है।

 

तीसरा, कर्मचारियों की नौकरी बदलने की मुश्किल: लंबे समय से Green Card प्रक्रिया में शामिल भारतीय कर्मचारी नौकरी बदलने से पहले अधिक सावधानी बरत सकते हैं, क्योंकि उनकी स्थायी निवास प्रक्रिया उनके नियोक्ता से जुड़ी हो सकती है।

 

क्या अमेरिका में भारतीय IT कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में हैं?

 

फिलहाल ऐसा कहना सही नहीं होगा कि इस फैसले से भारतीय IT कर्मचारियों की नौकरियां सीधे खतरे में आ गई हैं। कार्रवाई का मुख्य फोकस PERM और रोजगार आधारित स्थायी निवास प्रक्रिया पर है। हालांकि, अगर अमेरिकी प्रशासन H-1B और विदेशी कर्मचारियों से जुड़े नियमों की जांच और सख्त करता है, तो भारतीय IT कंपनियों और उनके कर्मचारियों को भविष्य में अधिक अनुपालन, दस्तावेजी जांच और वीजा संबंधी निगरानी का सामना करना पड़ सकता है।

 

भारतीय IT कंपनियों के लिए बढ़ेगी चुनौती

 

अमेरिकी बाजार भारतीय IT कंपनियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए इस कार्रवाई से कंपनियों को अपने विदेशी कर्मचारियों की भर्ती, H-1B sponsorship और Green Card प्रक्रिया में अधिक सावधानी बरतनी पड़ सकती है। कुल मिलाकर, ट्रंप प्रशासन का यह कदम अमेरिका में लंबे समय से काम कर रहे भारतीय IT पेशेवरों के लिए तत्काल वीजा रद्द होने का फैसला नहीं है, लेकिन रोजगार आधारित Green Card पाने की प्रक्रिया में अनिश्चितता और संभावित देरी जरूर बढ़ा सकता है।

 

आने वाले समय में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिकी श्रम विभाग इन कंपनियों के खिलाफ चल रही जांच के बाद क्या अंतिम कार्रवाई करता है और PERM प्रक्रिया में उनके लिए आगे क्या व्यवस्था तय होती है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User