कंगाल पाकिस्तान का जुगाड़ देख आप भी कहेंगे- इतनी गरीबी! ड्रोन हमलों के डर से चौकियों पर लगाए मछली पकड़ने वाले जाल

Oct 06, 2026 - 10:11
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कंगाल पाकिस्तान का जुगाड़ देख आप भी कहेंगे- इतनी गरीबी! ड्रोन हमलों के डर से चौकियों पर लगाए मछली पकड़ने वाले जाल

पाकिस्तान में ड्रोन हमलों का ऐसा खौफ है कि अब सुरक्षा चौकियों को बचाने के लिए मछली पकड़ने वाले जाल का सहारा लिया जा रहा है! जी हां, पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी इलाकों में पुलिस और सुरक्षा ठिकानों के ऊपर जाल लगाए जा रहे हैं, ताकि आसमान से आने वाले ड्रोन हमलों का खतरा कम किया जा सके.

हंगू में पुलिस चौकी पर ड्रोन से हुआ था हमला

  • यह मामला खैबर पख्तूनख्वा के हंगू जिले का है. अफगानिस्तान की सीमा से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित सरकी पियाला पुलिस चौकी पर 16 अप्रैल को ड्रोन से हमला हुआ था. हमले के बाद हथियारबंद हमलावरों ने चौकी को कई तरफ से घेरकर गोलीबारी भी की.
  • इस हमले की जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी ने ली. करीब सात घंटे तक चली इस मुठभेड़ में एक बख्तरबंद वाहन के चालक की मौत हो गई और एक पुलिसकर्मी भी घायल हुआ.
  • जानकारी के लिए बता दें कि हंगू को खैबर पख्तूनख्वा के संवेदनशील इलाकों में गिना जाता है.. पुलिस के मुताबिक, इस साल जिले में कम से कम 16 हमले हो चुके हैं.

चौकी के ऊपर बिछाया जा रहा मछली पकड़ने का जाल

  • ड्रोन हमलों से बचने के लिए हंगू पुलिस ने चौकियों के ऊपर कई मीटर की ऊंचाई पर जाल लगाने शुरू किए हैं. इन्हें चौकी की छतों और आसपास की दीवारों के बीच बांधा जा रहा है. देखने में ये जाल बिल्कुल वैसे ही हैं, जैसे मछुआरे मछली पकड़ने के लिए इस्तेमाल करते हैंय
  • स्थानीय पुलिस के मुताबिक, सरकी पियाला चौकी पर यह व्यवस्था करीब दो महीने पहले शुरू की गई थी. इसके बाद से वहां ड्रोन हमला नहीं हुआ है. हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि जाल की वजह से ही हमले पूरी तरह रुक गए हैं. पुलिस अधिकारी खुद भी मानते हैं कि यह सिर्फ सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत है.
  • एक सामान्य पुलिस चौकी को इस तरह के जाल से ढकने पर करीब 4 लाख पाकिस्तानी रुपये खर्च होने की बात हंगू के जिला पुलिस अधिकारी ने बताई है. खैबर पख्तूनख्वा के कई दूसरे संवेदनशील जिलों में भी इस व्यवस्था का इस्तेमाल शुरू किया गया है.

क्या जाल से रोका जा सकता है ड्रोन हमला?

पाकिस्तान पुलिस का कहना है कि अगर विस्फोटक से भरा ड्रोन जाल में फंस जाता है तो वह सीधे चौकी तक नहीं पहुंच पाएगा. अगर ड्रोन जाल के ऊपर ही फटता है, तो विस्फोट से निकलने वाले टुकड़ों का कुछ हिस्सा हवा में फैल सकता है और नीचे मौजूद जवानों को नुकसान कम हो सकता है. लेकिन विशेषज्ञ इस तरीके को पक्की सुरक्षा नहीं मानते. उनका कहना है कि जाल कितना काम करेगा यह ड्रोन के आकार, गति, जाल की बनावट और उसे लगाने के तरीके पर निर्भर करती है.

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पाकिस्तान में बढ़ रहे हैं ड्रोन हमले

  • खैबर पख्तूनख्वा में जाल लगाने की यह कवायद बताती है कि पाकिस्तान के सुरक्षा बलों के सामने ड्रोन से होने वाले हमले अब गंभीर चुनौती बन चुके हैं.
  • बीते कुछ महीनों में भी खैबर पख्तूनख्वा की कई दूसरे संवेदनशील पुलिस चौकियों पर सुरक्षात्मक जाल लगाने की जानकारी सामने आई है.
  • अधिकारियों के मुताबिक, कुछ जगहों पर इन जालों ने ड्रोन हमलों को नाकाम करने में मदद की. हालांकि, जाल को किसी अत्याधुनिक ड्रोन-रोधी प्रणाली का विकल्प नहीं है. यह कम खर्च वाला उपाय जरूर है.

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