पाकिस्तान में फिर सियासी बवाल: इमरान खान की रिहाई के लिए PTI का इस्लामाबाद कूच - KP में इमरजेंसी लगाने की तैयारी
पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने सरकार से बातचीत विफल होने के बाद इस्लामाबाद की ओर लॉन्ग मार्च शुरू कर दिया है. डॉन के मुताबिक, PTI की सरकार वाले खैबर पख्तूनख्वा (KP) में मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी खुद मार्च का नेतृत्व कर रहे हैं. पार्टी की प्रमुख मांग इमरान खान की रिहाई है.
लक्की मारवत से शुरू हुआ मार्च
मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने रविवार( 4 अक्टूबर) को खैबर पख्तूनख्वा के लक्की मारवत से मार्च की शुरुआत की. यह मार्च पहले 27 सितंबर को प्रस्तावित किया गया था, लेकिन केंद्र सरकार के साथ बातचीत के चलते इसे टाल दिया गया था. बातचीत बेनतीजा रहने के बाद PTI ने राजधानी की ओर बढ़ने का फैसला किया.
करक पहुंचा काफिला, राजधानी से करीब 256 किमी दूर
रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री अफरीदी के नेतृत्व में PTI का काफिला रविवार देर रात करक जिले तक पहुंच गया. यह इलाका इस्लामाबाद से करीब 256 किलोमीटर दूर है. मार्च के शुरू होते ही केंद्र और खैबर पख्तूनख्वा सरकार के बीच टकराव और बढ़ गया है.
KP में इमरजेंसी लगाने पर विचार
PTI के मार्च के बीच पाकिस्तान की संघीय सरकार खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन या इमरजेंसी लगाने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रही है. सरकार का आरोप है कि प्रांतीय सरकार आतंकवाद से निपटने और सुरक्षा एजेंसियों के साथ सहयोग करने में पर्याप्त कदम नहीं उठा रही है. एक सरकारी सूत्र के हवाले से दावा किया गया है कि प्रांत में इमरजेंसी लगाने का फैसला जल्द हो सकता है.
राज्यपाल ने दी इमरजेंसी लगाने की चेतावनी
खैबर पख्तूनख्वा के राज्यपाल फैसल करीम कुंडी ने रविवार को कहा कि अगर प्रांत को बचाने के लिए इमरजेंसी लगाना जरूरी हुआ तो ऐसा किया जाएगा. उन्होंने PTI कार्यकर्ताओं को भी चेतावनी दी. कुंडी के मुताबिक, सुरक्षा स्थिति बिगड़ने पर केंद्र संवैधानिक विकल्पों का इस्तेमाल कर सकता है.
गृह मंत्री मोहसिन नकवी से मिले राज्यपाल
PTI के मार्च के बीच राज्यपाल कुंडी ने पेशावर में पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी से मुलाकात की. बैठक में प्रांत की राजनीतिक और सुरक्षा स्थिति के साथ इस्लामाबाद मार्च पर चर्चा हुई. राज्यपाल भवन के मुताबिक, दोनों नेताओं ने आशंका जताई कि मार्च की आड़ में आतंकवादी सुरक्षा चौकियों को पार कर सकते हैं.
आतंकवाद के मुद्दे पर PTI सरकार घिरी
बैठक में खैबर पख्तूनख्वा सरकार पर आतंकवाद के खिलाफ अभियान में पर्याप्त सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया गया. राज्यपाल भवन की ओर से कहा गया कि अगर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को प्रांत को आतंकवाद और विनाश से बचाने के लिए गवर्नर शासन या इमरजेंसी जरूरी लगी, तो राज्यपाल कार्यालय अपनी संवैधानिक भूमिका निभाएगा.
रक्षा मंत्री ने PTI पर लगाया गंभीर आरोप
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी PTI नेताओं पर खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवाद को बढ़ावा देने में मदद करने का आरोप लगाया है. सरकार का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में केंद्र और प्रांतीय सरकार के बीच समन्वय जरूरी है.
आतंकवाद पर बातचीत बनी सबसे बड़ी वजह
केंद्र और PTI के बीच बातचीत टूटने की सबसे बड़ी वजह आतंकवाद के खिलाफ रणनीति बताई जा रही है. गृह मंत्री मोहसिन नकवी के मुताबिक, केंद्र चाहता था कि KP सरकार आतंकियों के सुरक्षित ठिकानों को रोकने, प्रतिबंधित TTP की निंदा करने, अफगान शरणार्थियों पर संघीय नीति का समर्थन करने और सुरक्षा बलों के साथ सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता निभाए.
PTI ने केंद्र पर लगाया अधिकार छीनने का आरोप
PTI का कहना है कि केंद्र सरकार आतंकवाद विरोधी कार्रवाई पर एकतरफा अधिकार चाहती है. पार्टी ने संघीय और प्रांतीय सरकार के बीच बातचीत के साथ राजनीतिक और जनजातीय प्रतिनिधियों को भी शामिल करने की मांग की. इसके अलावा PTI ने इमरान खान से मुलाकात और उनके इलाज को लेकर आश्वासन को भी मार्च खत्म करने की अहम शर्त बताया.
इमरान खान की रिहाई बनी मुख्य मांग
PTI के लॉन्ग मार्च का सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा पार्टी संस्थापक और जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई है. पार्टी लगातार सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रही है. अब इस्लामाबाद की ओर बढ़ रहे मार्च ने केंद्र और PTI के बीच तनाव को और गहरा कर दिया है.
पहले भी दी जा चुकी है गवर्नर शासन की धमकी
खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन या इमरजेंसी लगाने की चर्चा पहली बार नहीं हो रही है. 21 सितंबर को गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने चेतावनी दी थी कि अगर PTI इस्लामाबाद मार्च करती है तो केंद्र सभी कानूनी विकल्पों पर विचार करेगा. 30 सितंबर को संसदीय मामलों के मंत्री तारिक फजल चौधरी ने भी KP में इमरजेंसी लगाने के विकल्प पर गंभीरता से विचार किए जाने की बात कही थी.
राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री की बैठक में भी उठा था मुद्दा
रिपोर्ट के मुताबिक, 30 सितंबर को राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की बैठक में भी खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी लगाने के विकल्प पर चर्चा हुई थी. हालांकि, बाद में सरकार ने PTI के साथ बातचीत को प्राथमिकता देते हुए इस विकल्प को फिलहाल टाल दिया था. अब बातचीत विफल होने और PTI के मार्च शुरू करने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है.
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