अयोध्या आकर भी अखिलेश यादव का 'राम लला' से परहेज! क्या कहते हैं रामनगरी के प्रबुद्धजन

Akhilesh Yadav Ayodhya Visit: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव गुरुवार को अयोध्या के कृष्णापुर खानपुर (रसूलाबाद) गांव पहुंचे। मौका था सपा सरकार में मंत्री रहे तेज नारायण पांडेय उर्फ 'पवन पांडेय' के आवास पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ का। इस अवसर पर उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चेतावनी भी दे डाली।
अखिलेश ने व्यास पीठ का पूजन किया, कथा व्यास डॉ. राघवाचार्य जी महाराज से आशीर्वाद लिया और संतों द्वारा भेंट की गई गदा स्वीकार की। हालांकि, राम नगरी की पावन धरती पर कदम रखने के बावजूद राम जन्मभूमि मंदिर न जाने और राम लला के दर्शन न करने को लेकर अयोध्या के प्रबुद्ध वर्ग और संतों में गहरी नाराजगी है।
अखिलेश की सीएम योगी को चुनौती
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुए इस दौरे के गहरे राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान फैजाबाद सांसद अवधेश प्रसाद, पूर्व विधायक इंद्र प्रताप तिवारी 'खब्बू' समेत कई दिग्गज स्थानीय नेता मौजूद रहे। अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि विकास और एयरपोर्ट के नाम पर गरीबों व व्यापारियों को उजाड़ा गया है। उन्होंने वादा किया कि सपा सरकार बनने पर किसानों को सर्किल रेट का 6 गुना मुआवजा और 300 यूनिट मुफ्त बिजली दी जाएगी।
सपा प्रमुख ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सीधा ललकारते हुए कहा कि वे स्वयं अयोध्या से चुनाव लड़कर दिखाएं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा को अयोध्या से लड़ने के लिए कोई नया प्रत्याशी तक नहीं मिल रहा है। राम मंदिर में चढ़ावे और चंदे की चोरी के हालिया विवाद को लेकर भी उन्होंने सरकार को घेरा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पलटवार
दूसरी ओर, सीएम योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि सपा प्रमुख को अयोध्या की चिंता करने के बजाय आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि सपा शासन के दौरान ही रामभक्तों पर गोलियां चलाई गई थीं और थानों-जेलों में श्री कृष्ण जन्माष्टमी के आयोजनों पर रोक लगाई गई थी।

राम सबके हैं, दूरी क्यों?
अयोध्या आकर भी राम लला के दर्शन न करने पर स्थानीय नागरिकों, बुद्धिजीवियों और धर्मगुरुओं ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इक़बाल अंसारी (पूर्व पक्षकार, बाबरी मस्जिद) ने कहा कि अयोध्या धर्म की नगरी है और यहां से लोगों का अटूट विश्वास जुड़ा है। अखिलेश यादव को राम लला का दर्शन-पूजन जरूर करना चाहिए था, जिससे उन्हें 'सबका साथ, सबका विश्वास' मिलता।
प्रो. आशुतोष सिंह ने कहा कि जब अखिलेश जी ने ही राम मंदिर में चंदा चोरी का प्रकरण उठाया था, तो उन्हें मंदिर आकर देखना चाहिए था कि व्यवस्थाएं कैसी चल रही हैं। डॉ. वंदना जायसवाल ने कहा कि भगवान राम किसी एक व्यक्ति या दल के नहीं हैं, राम तो सबके हैं। अयोध्या आने पर उन्हें मंदिर जरूर जाना चाहिए था। डॉ. अविनाश तिवारी ने कहा कि राम मंदिर किसी सरकार का नहीं है। जनता का मान रखने के लिए उन्हें राम लला से दूरी नहीं बनानी चाहिए थी।
डॉ. मनीष सिंह ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते उन्हें जनता की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए था और मंदिर जाकर व्यवस्थाओं का जायजा लेना चाहिए था। डॉ. आशीष प्रताप सिंह (अध्यक्ष, शिक्षक संघ) ने कहा कि राम मंदिर कोई राजनीतिक स्थान नहीं है। राम लला के दर्शन करने से उन्हें लाभ ही होता, यह बेहद दुखद है।
डॉ. रमेश प्रताप सिंह ने कहा कि एक यदुवंशी होने के नाते उन्हें राम मंदिर जाना ही चाहिए था। दर्शन न करने से ऐसा प्रतीत होता है कि चंदा चोरी का मुद्दा उन्होंने सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए उठाया था। डॉ. समरेन्द्र बहादुर सिंह का कहना है कि सपा की छवि राम मंदिर आंदोलन में खलनायक जैसी रही है। निर्माण के बाद आए बदलावों को देखने के बजाय उन्होंने केवल कमियां ढूंढने और इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया। डॉ. कुमुद रंजन ने कहा कि अयोध्या जैसी पवित्र भूमि पर आकर भगवान राम के द्वार न जाना अनुचित है। इस राजनीतिक रवैये का असर आने वाले चुनावों पर भी पड़ सकता है।
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