एच-1बी वीजा के दुरुपयोग पर अमेरिका में गरमाई राजनीति, जेडी वेंस ने लगाए गंभीर आरोप, क्या है TCS का प्लान?

Oct 09, 2026 - 11:52
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एच-1बी वीजा के दुरुपयोग पर अमेरिका में गरमाई राजनीति, जेडी वेंस ने लगाए गंभीर आरोप, क्या है TCS का प्लान?

US visa

अमेरिका में राजनीतिक और कॉर्पोरेट हलकों में एच-1बी वीजा (H-1B Visa) और आईटी आउटसोर्सिंग को लेकर एक बार फिर तीखी बहस छिड़ गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट समेत कई बड़ी टेक कंपनियों पर एच-1बी वीजा व्यवस्था के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया है। वहीं, दूसरी ओर अमेरिकी श्रम विभाग के कड़े फैसलों और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की प्रतिक्रिया ने इस पूरे घटनाक्रम को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। ALSO READ: अमेरिका के सख्त फैसले से TCS, इन्फोसिस समेत बड़ी भारतीय कंपनियों पर शिकंजा, क्यों बढ़ी IT प्रोफेशनल्स की चिंता?

 

जेडी वेंस के तीखे आरोप

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का दावा है कि बड़ी टेक कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकालकर उनकी जगह कम वेतन पर विदेशी पेशेवरों को रख रही हैं। वेंस ने यहां तक कह दिया कि विदेशी आउटसोर्सिंग कंपनियों के जरिए अमेरिका लाए जाने वाले कर्मचारी एक तरह से ‘बंधुआ मजदूर’ जैसी स्थिति में काम करते हैं।

 

वेंस के अनुसार, अमेरिका में एच-1बी वीजा पर काम करने वाले कर्मचारी समान पद पर काम करने वाले अमेरिकी नागरिकों की तुलना में औसतन 20,000 डॉलर कम कमाते हैं। आउटसोर्सिंग कंपनियों के मामलों में यह अंतर 48,000 डॉलर तक पहुंच जाता है। वेंस ने उदाहरण देते हुए कहा कि माइक्रोसॉफ्ट ने साल 2025 में करीब 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की, लेकिन इसके उलट कंपनी ने 6,000 से अधिक नए एच-1बी वीजा मंजूर करा लिए। साथ ही, स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) से जुड़ी हजारों अर्जियां भी दाखिल की गईं। ALSO READ: अमेरिका में Microsoft पर H-1B वीजा के दुरुपयोग का आरोप, ग्रीन कार्ड कार्यक्रम से निलंबित, कई भारतीय कंपनियां भी घेरे में

 

अमेरिकी श्रम विभाग की विश्वविद्यालयों पर सख्ती

केवल टेक कंपनियां ही नहीं, बल्कि अमेरिकी प्रशासन का दायरा अब शैक्षणिक संस्थानों तक फैल गया है। अमेरिकी श्रम विभाग ने Infosys, TCS, Wipro, HCL, Cognizant, Microsoft, Adobe और Capgemini जैसी दिग्गज कंपनियों को 'PERM ग्रीन कार्ड' कार्यक्रम से निलंबित कर दिया है।

 

इसके अलावा, प्रशासन ने हार्वर्ड, येल और स्टैनफोर्ड समेत 9 प्रमुख विश्वविद्यालयों की जांच के आदेश दिए हैं। आशंका जताई जा रही है कि कुछ संस्थान ऐसे विदेशी छात्रों को ला रहे हैं जिनका इस्तेमाल अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन और अधिकारों को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है।

 

टीसीएस का बड़ा कदम

इन तमाम अमेरिकी पाबंदियों और नीतिगत झटकों के बीच देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने स्पष्ट किया है कि ग्रीन कार्ड से जुड़े इन प्रतिबंधों का उनकी भर्ती रणनीति या क्लाइंट्स के कामकाज पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। 

 

कंपनी ने अपनी लॉन्ग-रंग स्ट्रैटेजी को स्पष्ट करते हुए कहा है कि उनका मुख्य फोकस स्थानीय प्रतिभाओं को बढ़ावा देना है। इसके लिए एक मजबूत कैंपस रिक्रूटमेंट मॉडल तैयार किया गया है। टीसीएस ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा है कि वह अगले पांच वर्षों में अमेरिका में 15,000 से अधिक नए लोगों को नौकरी देने की योजना पर काम जारी रखेगी।

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