'संत रविदास नगर भदोही' से दलित-राजभर दोनों को संदेश, मुख्यमंत्री योगी ने एक नाम में जोड़ी 2 विरासत

Oct 05, 2026 - 11:05
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'संत रविदास नगर भदोही' से दलित-राजभर दोनों को संदेश, मुख्यमंत्री योगी ने एक नाम में जोड़ी 2 विरासत

Message to both Dalits and Rajbhar from Saint Ravidas Nagar Bhadohi

- मुलायम ने 30 जून 1994 को वाराणसी से अलग कर बनाया भदोही जिला, मुख्यमंत्री मायावती ने 4 दिसंबर 1997 को किया संत रविदास नगर

- 29 जुलाई को वाराणसी में पहली बार किया था नाम बदलने का ऐलान, अब भदोही की धरती से फिर बोले मुख्यमंत्री योगी

- अखिलेश ने 6 दिसंबर 2014 को कैबिनेट के जरिए फिर किया भदोही, योगी ने अब दोनों नामों को एक साथ जोड़ा

- भदोही को अपनी राजधानी बनाने वाले भार राज्य से निकला जिले का नाम, सरकारी इतिहास में भी दर्ज है उल्लेख

- 2027 से पहले पूर्वांचल के अहम दलित और राजभर समाज तक जाएगा नामकरण का राजनीतिक संदेश

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भदोही को ‘संत रविदास नगर भदोही’ नाम देने की बात दोहराकर इतिहास के साथ राजनीतिक संदेश भी दिया है। संत रविदास का नाम जिले की पहचान में वापस लाने से दलित समाज की आस्था और सम्मान जुड़ा है, वहीं ‘भदोही’ को बरकरार रखने से भार राज से जुड़ी ऐतिहासिक पहचान भी कायम रहेगी। पूर्वांचल के सामाजिक समीकरण में अहम दलित और राजभर समाज के लिहाज से भी इस फैसले के मायने हैं।

 

मुख्यमंत्री योगी ने पहली बार 29 जुलाई 2026 को वाराणसी में भदोही का नाम बदलने की घोषणा की थी। रविवार को भदोही की धरती से उन्होंने एक बार फिर स्पष्ट किया कि जनपद ‘संत रविदास नगर भदोही’ के नाम से जाना जाएगा। मुख्यमंत्री 1,340 करोड़ रुपए से अधिक की 112 परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

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मुलायम ने बनाया जिला, मायावती ने बदला नाम

तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने 30 जून 1994 को वाराणसी से अलग कर भदोही को नया जनपद बनाया। इसके तीन साल बाद 4 दिसंबर 1997 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने संत शिरोमणि गुरु रविदास के सम्मान में भदोही का नाम बदलकर ‘संत रविदास नगर’ करने का नोटिफिकेशन जारी किया।

 

करीब 17 साल बाद 6 दिसंबर 2014 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कैबिनेट की बैठक के माध्यम से ‘संत रविदास नगर’ का नाम बदलकर फिर ‘भदोही’ कर दिया। अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘संत रविदास नगर’ और ‘भदोही’ दोनों को जिले के नाम में स्थान दिया है।

भार राज्य की राजधानी से जुड़ा भदोही

भदोही का इतिहास जिला बनने से सदियों पुराना है। जिला प्रशासन के आधिकारिक इतिहास के अनुसार इसका नाम यहां के ‘भार राज्य’ से पड़ा, जिसने भदोही को अपनी राजधानी बनाया था। क्षेत्र में भार शासकों से जुड़े पुराने टीले और तालाब भी बताए गए हैं।

 

अकबर के शासनकाल में भदोही को दस्तुर बनाकर इलाहाबाद (प्रयागराज) सरकार में शामिल किया गया। बाद में यह अलग-अलग शासकों के अधीन रहा। वर्ष 1911 में बनारस रियासत का हिस्सा बना और आजादी के बाद वाराणसी जिले में शामिल रहा।

 

नामकरण में सामाजिक समीकरण का भी संदेश

संत रविदास दलित समाज के बड़े आराध्य और सामाजिक समरसता के प्रतीक हैं। उनका नाम जिले से दोबारा जुड़ना दलित समाज के लिए सम्मान के संदेश के रूप में देखा जा रहा है। वहीं भार राज से जुड़े ‘भदोही’ नाम को कायम रखना राजभर समाज की ऐतिहासिक विरासत को भी स्थान देता है।

 

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में संत रविदास के उस संदेश का भी उल्लेख किया, जिसमें सभी को अन्न मिलने और छोटे-बड़े के बिना भेदभाव साथ रहने की कल्पना की गई है। इसे उन्होंने केंद्र और प्रदेश सरकार की बिना भेदभाव योजनाओं से जोड़ा।

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इस तरह करीब तीन दशक में जिले के नाम की यह चौथी महत्वपूर्ण कड़ी है। मुलायम सिंह यादव ने भदोही को अलग जिला बनाया, मायावती ने इसे संत रविदास नगर किया और अखिलेश यादव ने फिर भदोही कर दिया। अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोनों नामों को जोड़कर ‘संत रविदास नगर भदोही’ की पहचान सामने रखी है।

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